राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (भारत)

राष्ट्रीय अंतरीक्ष दिवस
Oplus_131072

भारत का अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत 1962 मे भारतीय राष्ट्रीय अनुशांधान समिति के रुप मे हुई थी। इसके बाद 15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान सगठन (ISRO) का गठन किया गया। इसके बाद से ही अंतरिक्ष के क्षेत्र मे भारत के कार्यक्रम चलते रहे। भारत ने अपना पहला उपग्रह रुस के सहयोग से आर्यभट्ट अंतरिक्ष मे भेजा था। इसने अपना पहले प्रयास से उपग्रह रोहिणी को एसएलभी -3 से भेजा था।

भारत के लगातार प्रयास से चन्द्रयान 1 को 22 अक्टूबर 2008 को भेजा गया इसने चन्द्रमा की सतह पर पानी और हाइड्राक्लिल के संकेतों की खोज मे अहम भूमिका निभाई। चन्द्रयान 2 को 22 जुलाई 2019 को भेजा गया। ये चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का प्रयास करते समय अंतिम क्षण मे संपर्क टुट गया था। जवकि इसका ऑर्वीटर अब भी चन्द्रमा की कक्षा मे है और चांद की सतह पर पानी के आंकड़े भेज रहा है।

चन्द्रयान -3 को 14 जुलाई 2023 को लांन्च किया गया था। इसका लैडर विक्रम और रोवर प्रज्ञा 23  अगस्त 2023 को चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा। इस तरह भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना। इसका उदेश्य चन्द्रमा की सतह पर सुरक्षित उतरना, रोवर की धूमने की क्षमता को दिखाना तथा वहां की मिट्टी और वातावरण का बैज्ञानिक अध्ययन करना था। इस तरह भारत चन्द्रमा पर उतरने वाला 4 था देश बना।

इस दिवस का उदेश्य देश के युवाओं और वैज्ञानिको की उपलब्धियों का सम्मान करना, अंतरिक्ष अनुसंधान और टेक्नोलॉजी के प्रति नई पीढ़ी मे रुचि जगाना है। भविश्य मे चन्द्रयाऩ को भेजकर वहां का नमुना लाना होगा। इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है। लोगो को इस बिषय मे बढ़ते रुची को देखते हुए सरकार ने इसे जनजागरण का अभियान बनाने का विचार किया जिससे की लोगो की उत्सुकता बढे और अनुसंधान मे तेजी आये। लोगो को जुराव हो और कार्यक्रम मे तेजी से सुधार आये। भारत अपने लक्ष्य पर बढता हुआ एक दिन सर्वोच्य स्थान हासिल करेगा इसकी हम आशा करते है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः

By sneha

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!