भारतीय अक्षय उर्जा दिवस (Indian Akshay Urja Day)
भारत की बढ़ती उर्जा जरुरत को पुरा करने के लिए किये जा रहे प्रयास मे सतत उर्जा के स्त्रोत का होना जरुरी है। समय के साथ बदलते परिदृश्य मे इसकी आवश्यकता इसलिए भी जरुरी है कि आनेवाले समय मे कहीं कच्चे माल की कमी का शिकार नही होना परे। खनीज संपदा के सिमित स्त्रोत के कारण इस तरह के उर्जा स्त्रोत की खोज जरुरी हो गई है। इस तरह के उर्जा स्त्रोत मे सौर, पवन और जल जैसे क्षेत्र आते है। इससे मिलने वाली उर्जा को सतत उपयोग किया जा सकता है। इसलिए इसके विकास मे बढचढकर भाग लेने की जरुरत है।
सरकार का इस ओर ध्यान गया है और छोटी बड़ी अवश्यताओं के हिसाव से इसकी उपलबध्ता को बढाया जा रहा है। लोग इस क्षेत्र मे भी रुची दिखाने लगे है। जिससे सरकार को अतिरिक्त बिजली के खर्च को समित करने मे मदद मिलने लगी है। पनवीजली के उत्पदान के लिए नदी पर डैम का निर्माण करना और उससे विजली बनाने की प्रक्रिया वडे जोरशोर से चल रहा है। वही पर राजस्थान मे पवन उर्जा का विकास किया गया है। जहां पर हवा तेज चलती है वहां पर इस तरह के उर्जा के स्त्रोत को खोजा जा रहा है। जिससे की इस तरह के कार्य मे तेजी आये।
सोलर विजली के लिए दुर दराज के क्षेत्र जहां विजली अभी नही पहुंची है लोग तेजी से इसका उपयोग कर रहे है। खेत मे पानी निकालने के लिए भी इसका उपयोग किया जा रहा है। वही पर पहाड़ी इलाके मे भी इसकी मांग बढ़ी है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों मे भी लोगो की अभिरुची बढ़ी है। सरकार अब सरकारी भवनो पर भी इस तरह के प्रयोग का मन बना रही है जो एक अच्छी पहल है।
अक्षय उर्जा स्त्रोत से सरकार को उर्जा क्षेत्र मे हो रहे खर्च पर दवाव कम होगा जिससे की घरेलू कार्य को बढावा मिलेगा। इस बात को जन जागरण का अभियान बनाकर लोगो मे उत्साह को जगाना है और कार्य को गति देना है जिससे की ये समाजिक जागरुकता का विषय बन जाये। इसके लिए 20 अगस्ते के दिन को खास बनाया गया है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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