विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस
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वरिष्ठ लोग समाज मे आदरनीय होते है। उनका आचार विचार रहन सहन से लोग प्रभावित होते है। वरिष्ठता को पाने के लिए जीवन के मौलिकता के साथ आत्मसात करने की कला ये धनी होते है। आपने जीवन लक्ष्य को पाने के लिए उनके परिश्रम और उनके त्याग को समाज मे सरहना मिलती है। समाज को एक दिशा देने मे उनके अनुभव का उपयोग किया जाता है। समाज मे कुछ लोग ज्यादा घुले मिले रहते है पर कुछ लोग एकाकी रहना पसंद करते है फिर भी उनके विचार और व्यवहार कही न कही समाज को प्रभावित करते है।

बढ़ते उम्र के साथ अनुभव की गहनता भी बड़ी होती है। कभी ऐसा होता है कि युवा को उनकी बातें अप्रसांगित लगती है और वो उसपर घ्यान नही देते है। जब उनको सच्चाई का एहसास होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि बुजुर्गों को सम्मान करना चाहिए। सम्मान देने से ही उनके विचार की प्रसंगिकता को भी बल मिलेगा और लोग जरुर प्रभावित होंगे। यह प्रभाव सार्थक होता है क्योकि ये परिस्थिती की गहराई से निकलकर आया होता है।

बुजुर्गो की बढ़ती परेशानी का भी अच्छी तरह से ख्याल रखना चाहिए। उनका अकेलापन उनको बहुत खलता है। पहले संयुक्त परिवार होता था जिसमे बुजुर्ग और बच्चो के पास समय होता था जिससे बच्चो को बड़ो का ज्ञान मिल जाता था वही पर बुजुर्गो को उनका मनोरंजन मिल जाता था। इस तरह से उनका अकेलापन भी दुर हो जाता था और समय भी कट जाता था। आज का एकल परिवार होता है जिसमे इस तरह की व्यवस्था देखने को नही मिलती है। लोगो को चाहिए के वो बुजुर्गो के साथ बातचित करे जिससे उनको सुझाव मिलेगा जिसका वो अनुसरण भी करे। इस तरह उनको एक सफल व्यक्ति के रुप मे स्वयं को स्थापित करने मे मदद मिलेगी।

बुजुर्गो के प्रति आभार प्रकट करने से उनको हिनता की भावना नही आती है उनको लगता है कि उनकी प्रसंगिकता आज भी बनी हुई है। ऐसा करने से विचार की गंभिरता को समझने मे मदद मिलती है। उच्चश्रींख बिचार को समय के साथ समायोजन करने का मौका मिलता है और प्रभावित व्यक्ति को विकास के अधिक अवसर मिलते है। विचारोउन्मुख व्यक्ति एक मनोवैज्ञानिक सहारा खोजता है और इससे अच्छी सहारा कोई मिल भी नही सकता है।

बढ़ती उम्र के साथ परेशानीयां भी बढ़ने लगती है इसके लिए उनके चिकित्सीय सहायता का पुरा ख्याल रखना चाहिए। इस प्रक्रिया मे व्यक्ति को कठीन परिस्थिती की सारी जानकारी हो जाती है जिससे की यदी वो चाहे तो स्वयं के लेए अच्छे दिन बनाने मे उपयोग कर सकते है। युवा पिढ़ी और बुजुर्गो के बीच के समझ को गहराई देने के लिए ही 21 जनवरी को जनजागरण का अभियान बनाया गया है। भौतिकता मे लिप्त युवा को ज्ञान दर्शन से उनको आने वाला समय सहज और आसान हो जाता है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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