अंतर्राष्ट्रीय विचित्र संगीत दिवस (International Strange Music Day)
संगीत सुनना शौकिया और मनोरंजक दोनो है। शौकिया सुनने वाले लोग अपने संगीत के प्रति ज्यादा लगाव रखते है जिससे उनको मनोरंजन करने के साथ कार्य भी आसानी से होता है। संगीत के इस लगाव को विस्तार देने के लिए कुछ नया करने का जजबा उनके दिमाग मे रहता है। इस तरह के विचार के लिए कुछ गुणगाना कुछ बोलना जैसे क्रिया किये जाते है। यही से कुछ विचित्र करने की कला का विन्यास होता है। ये कला ज्यादा खुशी देता है। ततकालिक तैर पर किये गये इस तरह के कार्य को कोई इतिहास नही होता है पर समय के साथ ये मनोरंजन के साथ ही उत्साह को भी नियंत्रित करता है।
जो लोग मनोरंजन के तौर पर सुनते है उनके लिए तनाव या फिर कुछ खास अवसर पर ही अपने को संगीत से जोड़कर खुद को उत्साहित करते है। संगीत का पसंद सबका आपना अलग – अलग होता है। लेकिन प्रभाव तो एक सीमा तक मनोरंजक ही होता है। नर्भस स्थिती को ततकालिक तौर पर ये लाभ पहुंचाता है। श्रृजन कला के विकास के लिए भी कुछ खास तरह से व्यवहार को करते हुए लोग आदी हो जाते है जिसका प्रभाव यदी व्यापक हो जाय तो वो एक नया व्यवहार के रुप मे सामने आता है।
इस तरह के विचार के साथ यदी किसी व्यक्ति का कार्य अच्छा हो जाता है। यदि उसका मानसिक तनाव कम होता है तो उसको इस तरह के कार्य करने चाहिए। इसके लिए किसी खास तरह की व्यवस्था की जरुर नही है। झरना की आवाज, हवा की सरसराहट, चीडियों का कलरव, एक चीर शांती मे हल्की सी आवाज, घड़ी का टिकटिक करना आदि से प्रभावित होने वाले लोग को भी लाभ पहुँचता है। जीवन को संयमित और नियंत्रित करने के लिए एक उन्नत व्यवसाथा हिस्सा बनाना जरुरी होता है जिससे व्यक्ति को जीवन की नवीनता का एहसास होता है।
अनायास ही हसना, कुछ बोलना और व्यंग से स्वयं को तरंगित करने हुए हल्का महसुस करना भी एक कला है। गहरी निऱाशा, गहरी चिंता, गहरी सोच प्रवृति के लोग कभी-कभी हिंसा के शिकार हो जाते है। उनका अकेलापन उनके लिए घातक सावित होता है। इसको रोकने के लिए कुछ विचित्र संगीत को अपनाकर स्वयं उत्साहित करते हुए लाभकारी प्रभाव प्रकट करना जीवन को उर्जावान बनाने की एक कला है। इस तरह के वीचार हमारे आत्म सम्मान को जहां उचा करते है वही विकास की डोर भी बंधती है।
लेखक एवं प्रेषक अमर नाथ साहु
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