राष्ट्रीय एकता दिवस

राष्ट्रीय एकता divas
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भारत एक विशाल देश है। यहां बहुत धनी मे लोग रहते है। यहां विभिन्न तरह की भेष-भुषा, भाषा शैली, रहन-सहन के लोग निवास करते है। यहां जातीय समीकरण में लोग बंधकर रहते है। वहुसंस्कृतिक वाला ये देश आज अपने खास पहचान को पाने के लिए संघर्ष कर रहा है जो पहले इसकी खासियत थी। यहां की प्राकृतिक सुषमा में भी काफी विभिन्नता पाई जाती है। इस सबके बीच यहां के लोग शांतिप्रिय जीवन जीने मे विश्वास रखते है।

यहां के चिंतक और विचार के साथ ऋषि मुनियों, तपस्वियों ने भी भारत को एक शांतिप्रिय देश बनाने मे अहम भूमिका निभाई है और आज निभा भी रहे है। कुछ असमाजिक तत्व को भारत की ये शांति प्रियता खलती है। इसलिए आये दिन अशांति फैलाने के लिए नापाक हरकत करते रहते है। हिमालय की गोद मे बसा और तिन ओर से समुद्र से घिरा भारत को पहले सुरक्षित समझा जाता था लेकिन अब पहले की स्थिति नही रही। आज के वैश्विक बदलाव के इस दौर में नए शोध ने सबको अस्थिर कर दिया है। इसी अस्थिरता के बीच राष्ट्रीय एकता की मजबूती प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैु।

राष्ट्रीय एकता ही देश की ओ मजबुत स्तंभ है जिससे सहारे देश की उन्नती और नागरिक के उत्तम जीवन की संकल्पना को पुरा किया जा सकता है। देश को एक सुत्र मे बांधने के लिए किये जा रहे प्रमुख प्रयासों मे से कुछ प्रमुख प्रयास निम्नलिखित है।


•जाति प्रथा का बिरोध करना
• समाजिक कुरितियों का उन्मूलन करना।
• संस्कृतिक विरासत की प्रखरता को समझते हुए नये गुणात्मक पहलु का विकास कारना।
• राजनितिक स्थिरता को बनाने के लिए प्रयत्नशील रहना।
• आर्थिक, समाजिक और वैश्विक चुनौतियों को साधने के लिए वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना।
• उन्नत कृर्षि, व्यवसाय, सुरक्षा, व्यपार को लगातार बढावा देना।
• वेरोजगारी, जनसंख्या तथा जनसंख्या अनुपात को सही करने के प्रयास किये जा रहे है।


राष्ट्र की एकता को बनाये रखने मे यहां के पर्व त्योहार और लोगो की आम जीवन शैली के साथ जीवन की जोद्दोजहत के साथ अपनी एक विशिष्ट सोच खास मायने रखती है। जिसके कारण कभी भी कोई दुराचारी भारतीय संस्कृति को मूल नष्ट नहीं कर सके। यहां के लोगो को मिलने वाली कुख खास व्यवस्था भी मानये रखती है।


• धार्मिक स्वतंत्रता के साथ बिचार की स्वतंत्रता एक महत्वपुर्ण पहलू है।
• बिभिन्न समप्रदाय के लोग अपनी विशिष्टता के बावजूद एकता के सुत्र को साधते है।
• भारतीय लेखन कला ने भी लोगो के विचार को एक संयुक्त बंधन दिया है। जिसमे लोग आपनी जीवन को परिष्कृत करते हुए आगे बढ़ते है।


भारत की एकता को यहां के संगठनात्मक व्यवहार ने भी वहुत प्रभावित किया है। संगठनात्मक व्यवहार से लोगो को एक सिमित दायरे मे अपने गुणात्मक पहलु को समझने और परखने का मौका मिलता है वहीं पर कुरितियो और कुसंस्कारो का भी वरोध और सुधार देखने को मिलता है। यहां पार्यावरण भी हमारे रहन सहन को प्रभावित करता है जिसके कारण यहां के लोगो की एक विशिष्ट पहचान बनी हुई है। आज की कुछ खास जरुरत है जिससे की लोगो को राष्ट्रीय भाव की मजबुती प्रदान हो सके। कुछ जरुरी तथ्य इस प्रकार है।


• राष्ट्रीय विषय के हर पहलू को समाजिक स्तर पर मंथन।
• लोगो की आत्म निर्भता जिससे की स्वतंत्र विचार प्रभावित ना हो।
• राजनितिक अस्थिरता को रोकने के लिए असिमित पार्टी बनाने की व्यवस्था मे सुधार।
• अव्यवहारिक धर्मांतरण की व्यवस्था पर कराई से कारवाई।
• आसान, सस्ता और उच्च कोटी की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ हमारी वैदैकि गंथों की पढाई जरुरी है।


31 अक्टूबर का खास दिन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की व्यवस्था को मजबुती प्रदान करने और उच्च विचार शक्ति बनाने के लिए बनाया गया है। यहां के हर व्यक्ति का ये कर्तव्य है कि वो अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठापुर्ण व्यवहार को क्रियांवित करता रहे और विकास की सर्वच्च स्तर को पाने मे अपनी अहम भूमिका निभाये।


लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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By sneha

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