
अंतर्राराष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस ( ( International Snow Leopard Day )
हिम तेंदुआ बिल्ली प्रजाती का एक जानवर है। बिलली की तरह दिखने वाली इस जानवर के शरीर पर सफेद रंग के फर होते है। इसके शरीर पर हल्की काले गहरे भूरे रंग का धब्बा होता है। ये एशिया के पहाड़ी इलाकों का मूल निवासी है। यह उचाँई पर स्थित चट्टानों और चोटीयों पर निवास करता है। इसका आयु 15 -25 साल तक की होती है। ये एक बार में 2 -5 बच्चो को जन्म देती है। ये मांसाहारी जानवर है। प्राकृतीक आवस मे रहने वाले जीव है। ये नीली भेड़, बकरी आदि का शिकार करते है। भोजन की कमी के कारण छोटे जीव गिलहरी, चुहा तक को अपना शिकार बना लेता है।
पर्वतों पर बढ़ती मानव हलचल ने इसके लिए समस्या पैदा कर दी है। मानव के आवागमन के बाद इनकी सुरक्षा की खतरे मे पर गई है। इसका उपयोग कई तरह के दवाई बनाने मे भी किया जाता है। बदलते पार्यावरण के कारण भी मौसम मे बदलाव देखा गया है जिससे की इसके रहन-सहन मे कमी आई है। भोजन की तालाश मे ये अब उँची चोटी से निकलकर निचे के तरफ आने लगे है। यहां वे पालतू पशुओं का शिकार कर लेता है जिससे की इसपर हमले होने लगे है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे लुप्त प्राय प्राणी की श्रेणी में रखा है। अभी तक इसकी अनुमानित जनसंख्या 718 है। आने वाले समय मे यानी की 2040 तक इसकी जनसंख्या मे 30% तक की कमी आने का अनुमान है। इसको देखते हुए वैश्विक स्तर पर पहल की जा रही है। बिभिन्न देशों के सरकारो ने इसकी हत्या रोकने तथा इसको संरक्षित करने के लिए प्रयास तेज कर दिये है। आशा है आने वाले समय मे सार्थक परिणाम मिलेंगे।
पाकृतिक सुषमा को बनाये रखने के लिए किये जा रहे प्रयास को सबलता प्रदान करने के लिए विश्व के हर व्यक्ति का कर्तव्य होता है कि ओ अपने स्तर से प्रयास करे और उम्मीद के दामन मे एक नया अध्याय जोड़े। ऐसा करने मात्र से विश्व की खुबसुरती बदल जायेगी और एक नवजीवन का एहसास होगा। 23 अक्टूबर का खास दिन हिम तेंदूआ को संरक्षण प्रदान करने के लिए विशेष बनाया गया है। लोगो को इसके बारे मे जानकारी हो जो एक आवाज बनकर इसकी सुरक्षा को मजबुत करे। इसके प्राकृतिक आवास, भोजन और इसके प्रजनन की पुरी प्रकिया मे सुधार हो जिससे की इस जीव का जीवन यात्रा सुंदर बने और पाकृति का एक और जीव इस धरा पर से सदा के लिए बिदा होने से बच जाय।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः
- विश्व ओजोन दिवस पर ओजोन के संरक्षण के लिए विचार करने का है जिससे की पार्यावरण को संरक्षण मिले।
- कुत्ता मानव का पहला दोस्त कहा जाता है इसको विशेष देखभाल की जरुरत है।
- अहिसा के मानने वाले लोग प्राकृतिक के बेहद करीव होते है।