
राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस (National Fish Farmers Day),
मछली आजकल एक प्रमुख खाध्य पदार्थ के रुप मे पहचाने जाने लगा है। पहले यह परंपरागत रुप से भोजन के रुप मे आता था। लेकिन आजकल इसको व्यसायिक रुप से उत्पादित किया जाता है। मछली पालन के लिए छोटे तालाब से लेकरके बड़े समुद्र स्तर पर इसके उत्पादन की व्यवस्था बढ़ती जा रही है। मत्स्य से जुड़े व्यवसाय को नीली क्रांति के रुप मे देखा जाता है। जब मछली के सफल पेरित प्रजनन को सफलता पुर्वक कर लिया गया विकाश की एक नयी धारा का सुत्रपात हुआ। इसके बाद जरुरत के हिसाब से इसको नियंत्रित किया जाने लगा तो इस क्षेत्र मे उल्लेखनीय उपल्बधी हासील हुई।
मत्स्य के क्षेत्र मे होने वाले विकास से लोगो के आवगत होने की जरुरत है जिससे की समय के साथ अच्छी लाभ कमाया जा सके। परंपरागत व्यस्था से होने वाले परिवर्तन को आसानी से सिखने तथा उसका भरपुर लाभ उठाने की ततपरता के रुप मे आज के दिन को रखा गया है। कुछ नया सिखने के लिए जगरुकता के साथ स्वयं की ततपरता की भी जरुरत होती है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगो तक विकाश की धारा को पहुँचाने तथा उनको प्रोत्साहित करने के उदेश्य से ही इस दिन को चुना गया है।
आशा हे कि लोग इस कार्य के प्रति आपनी जानकारी को नवीनता प्रदान करेगें तथा एक दुसरो को जानाकारी देकर उच्च स्तर के व्यपारीक लाभ उठायेंगे।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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