
राष्ट्रीय दान दिवस, ( National Give Something Away Day)
दान को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। जिससे कमजोर लोग सहारा पाकर खुद को स्थापित करने मे सक्षम होते है। कमजोर जो असहाय होते है उसके विकाश के सारे रास्ते बंद हो जाते है। किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिती आ जाती है उससे निपटने के लिए उसके पास दान मांगने के अलावा कोई मार्ग नही बचता है। जब दान पाकर कोई अपने को संभाल लेता है तो वह कृतघ्न हो जाता है। दाने पाने वाला खुद ये महसुस करता है कि इस संसार मे कोई शक्ति है जो उसको सहारा बन सकता है। इस तरह के भाव से समाज को एक शक्ति मिलती है जो उसको आपस मे जोड़कर रखता है।
दानवीर कर्ण के बारे मे महाभारत मे चर्चा होती है। दानवीर कर्ण को जो राज्य मिला था वो भी दान मे ही मिला था। खुद वो दान करके के लिए दानवीर कर्ण के नाम से विख्यात हुए। दानवीर कर्ण से उनका कवच कुंडल मांगने के लिए इन्द्र देव वेश बदलकर आ गये जबकि इस बात की जानकारी सुर्य देव ने दानवीर को पहले ही दे चुके थे लेकिन जब दानवीर के दान का समय आया तो उसने मांगनेवाले को निराश नही किया। इन्ही विशेषता के कारण महाभारत मे वे दानवीर कर्ण के नाम से विख्यात हुए जो एक समाजिक आदर्श के रुप मे जाना गया।
एक बार वामन देव ने राजा बली से वेशबदलकर दान मांगने आये। उन्होने मात्र तीन पग धरती मांगा राजा वली ने मांग स्वीकार किया। तो वामन देव ने एक पग मे पुरी पृथ्वी और दुसरे पग मे पुरा स्वर्गलोग नाप लिया और पुछा की तीसरा पग कहां रखु तो राजा बली ने कहा की तीसरा पग हमारे माथे पर रखिये। इसतरह उसने अपने दान की लाज बचाई। इसके बाद भगवान विष्णु ने उसे पताल लोक का राजा दिया और कहा की मृत्यू के पश्चात उनको स्वर्ग की प्राप्ती होगी।
दान की महीमा को बहुत ही खुबसुरत तरीके से समाज को समझाया जाता है जिससे की उंच-नीच के भेदभाव को भौतिक स्तर पर बदला जा सके। वैचारीक स्तर पर जब व्यक्ति पहुँचता है तो वह अथक प्रयास करता है स्वयं को आगे ले जाने के लिए इसी प्रयास से समाज के उच्च आदर्श का निर्माण होता है। जो समाजिक समरसता को लाता है और आदर्श समाज की स्थापना करता है।
कहा जाता है कि ह्दय खोलकर दान किजिय। कुछ जगह कहा जाता है कि नही कुछ तो अपने कमाई का कुछ भाग दान किजिए। दान से व्यक्ति के अंदर एक उच्च आदर्श का भाव आता है जो उसके शक्तिशाली महसुस करवाता है। 15 जुलाई का दिन को इस भाव के लिए जागरुक करने के उदेश्य से बनाया गया है जिससे की दान की प्रबृति समाज मे बढ़े और उच्च कोटी की व्यवस्था का निर्माण हो।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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