नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस

नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस

विश्व की शांति के लिए मनाया जाने वाला ये अनोखा उत्सव है। संयुक्त राष्ट्र दवारा शांति के नोवेल पुरुस्कार विजेता दक्षिण अफ्रीका के पुर्व राष्ट्रपति नेल्सल मंडेला के जन्म दिवस की यादगार मे इसे मनाया जाता है। रंगभेद उन्मुलन, मानवाधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता की स्थापना के लिए किये गये उनके प्रयास के लिए उनको याद किया जाता है और समाज को प्रेरित किया जाता है कि शांति के लिए वो अपना सहर्ष योगदान देते रहे जससे की जीन्दगी सुलभ और आसान बनी रहे।

शांति एक जरुर तथ्य है। एक सुखद जीवन के लिए इसकी सख्त जरुरत होती है। पर कहां जाता है कि शांति उपहार मे नही मिलती है। इसको स्थापित करना परता है। यानि की इसके लिए सतत गहरे प्रयास की जरुरत होती है। शांती काम, लोभ, मोह, तृष्णा जैसे शक्तिशाली उन्मादी बिचारधारा के सम्मन, नियंत्रण, नियमन और परिशोधन से निर्धारित होता है। समाज मे एक खास तरह के लोग पैदा होते है जो जन्म से ही उन्मादी विचारधारा के होते है। वह अपने लिए लगातार एक सक्रिय माहौल बनाते रहता है। शुरुआती दौर मे लोग उसे नजरअंदाज करते है लेकिन वही आगे चालकर अपने खास मानसिकता के लिए एक अलग ही मुकाम हासिल कर चुका होता है जिसमे शांति तो बिल्कूल ही नही रह सकती है।

यही से शांत के लिए संधर्ष की कहानी शुरु होती है। लम्बे चलने वाली इस संधर्ष मे समाज को जागृत करने की जरुरत होती है। इसमे समाज एक अपराध के विरुद्ध एकजुट होते है और एक उच्च शक्तिशाली उत्कृष्ट समाज का निर्माण करते है जो सबको न्याय देने के लिए कटिबद्ध होता है। न्याय की स्थपाना के साथ सभी तरह के लोगों की भावना का सम्मान होता है। यही से शांति कि बात आती है। कहा जाता है कि जब नारी और दवे कुचले लोगो का सम्मान होता है तो वहां शांति की स्थापित समाज माना जाता है।

शांति के धारा सदा बनी रहे इसके लिए सतत प्रयास की जरुरत होती है। जो लोग उन्नमादी और प्रभावी प्रबृति के होते है। उसको नियंत्रित किये जाने की जरुरत होती है जिससे की एक स्वस्थ्य समाज की व्यवस्था सदा बनी रहे। इसके लिए जन जागरण जरुरी होता है। इसमे नाम नेल्सन मंडेला का आता है जिन्हेने लम्बे समय तक शांति के लिए कार्य किया। उनको इसके लिए नबेल पुरुस्कार भी मिला। समाज को एक संदेश देने के लिए की शांति के लिए किमत चुकानी परती है और जरुरी भी है। इस पेरणा को सदा भाव पुर्ण जागरण के लिए ही 18 जुलाई के दिन को चुना गया है। हम आशा करते है कि शांत के लिए सब कटीबद्ध रहेगे और अपने अपने स्तर से सतत कार्य करते रहेंगें।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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