
अंतर्राष्ट्रीय न्याय के लिए विश्व दिवस (World Day for International Justice)
न्याय विकास की रीढ़ है। एक दुसरे के साथ व्यवस्था पुर्वक रहने के लिए जरुरी तथ्य है न्याय। न्याय से ही एक दुसरो को बास्तविक रुप से समझने का मौका मिलता है। न्याय के बिना वास्तविक जीवन की बुनियाद नही रखी जा सकती। न्याय वो बीज है जो जीवन में सुचीता सिखाती है और सामाजिक व्यवहार सिखाता है। कमजोर और ताकतवर लोग एक साथ सहयोग की व्यवस्था से रहते हुए सहयोग पुर्ण व्यवहार का निर्माण करते है जिससे चुहमुखी विकास होता है।
न्याय यदी ना हो तो ताकतवर लोग अपना मनामनी करेंगे जिससे अराजकता फैल जायेगी। क्योकी ताकत सबकी एक जैसी नही रहती है इसका समीकरण विगरते बनते रहता है। जब समाजिक न्याय की स्थापना होती है तो शक्ति व्यक्ति मे नही समाज मे होता है जिससे विकास की धारा चहुओर बहती है। सभी लोग एक दुसरे से हिलमिलकर रहते है। जहां न्याय होता है वहां नारी की सम्मान भी होती है।
पाकृति के अंदर हर वस्तू अपनी एक न्याय व्यवस्था के साथ जुड़े हुए है और सब एक सुत्र मे बंधकर चलते है। मानव मन के उच्चश्रिंख मानसिकता के कारण ही उसका पतना होता है। काम चोरी करना, आलस करना, दुसरे से इर्ष्या करना जैसे विकार के कारण ही समाज टुकड़ो मे टुट जाता है। न्याय की स्थापना से एक सुखद और मनोयोग जैसा विचार का विकास होता है।
अंतर्राष्ट्रीय न्याय से तातपर्य विश्व स्तर पर मानव कल्याण की भावना से सबको देखना और विकाश की एक स्वस्थ्य परंपरा का विकास है जिससे विकास के नये-नये कृर्तिमान स्थापित किये जा सके। इतिहास स्वस्थ्य न्याय व्यवस्था की प्रसंशा करता है और इसको सतत क्रियाशील रखने के लिए प्रेरित भी करता है। 17 जुलाई का दिन खास तैर पर न्याय की उच्च आदर्श को स्थापित करने तथा जागरुकता बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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