
अंतर्राष्ट्रीय कभी हार न मानने का दिवस (World Never Give Up Day)
जीवन मे आने वाली कठीन बाधाओं के सामने दृढ़ संकल्प शक्ति, सहन शक्ति और हिम्मत को बनाये रखने से कार्य अपने नियत समय पर होकर सुकून देता है और वास्तविक जीवन की सच्चाई से अवगत कराता है। अपने सपनो और लक्ष्यों को नही छोड़ने के लिए अपने प्रेरणा के स्त्रोत को जागाना परता है। संधर्ष, बामारी या मुश्किल घड़ी मे भी आगे बढ़ते रहने की आंतरिक शक्ति को पहचानकर बाधा को दूर करना होता है जिससे लोगो के प्रेरणा स्त्रोत आप बन सके। कठीनाई सबको आती है लेकिन अपने आंतरिक गुण के कारण किसी को आसान तो किसी को बहुत कठीन मालूम होता है।
हमारा दिमाग कम उर्जा खर्च करते हुए एक न्यूमतम अवस्था मे रहना चाहता है। जब कोई कार्य होता है तो उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। यदी कार्य कठीन हो तो समायोजन के साथ नये-नये जानकारी को भी मिलाकर एक युक्ति संगत विचार निकालना होता है और फिर कार्य को आगे बढाना होता है। इसके बाद भी आती जानकारी का समयोजन करना होता है। इतनी अधिक कार्य को करने की यदि अभ्यास नही है तो अपका दिमाग अधिक कार्य से विरक्त कर देगा और आपको थकाकर असंभव बताकर निम्तम उर्जा के हासिल करना चाहेगा।
आपका सोच भी आपके दिमाग का ही भाग है पर उर्जा संचालन के लिए शरीर क्रीया विज्ञान को समझना परता है और कार्य को करना होता है। यही पर कहा जाता है की कभी हार नही मानना चाहिए यानी की कार्य को टुकड़ो मे तोड़कर कार्य को समय और परिस्थिती के साथ उपलब्ध जानकारी के साथ स्वयं मे सुधार लाते हुए आगे बढना होता है। कभी न हार मानाना का मतलब की आपको सफलता पर विश्वास है लेकिन मार्ग कठीन लग रहा है तो हार नही मानने का मतवब की आपका मनोबल आपकी कार्य क्षमता को रोक रही है। यही सबलता आपको उर्जावान बनयेगा। आपको अपने लिए प्रेरक बातों का ख्याल करना होगा जिससे की आपके कार्य को बल मिलेगा और आपको नही हारने के लिए शक्ति का स्त्रोत जागृत होगा। इसके बाद आपकी सफलता निश्चित होगी ऐसी दृढ़ता आ जायेगी।
इसी भावना को जागृत करने तथा देश, समाज और संस्था को आगे बढ़ाने के लिए 18 अगस्त को जनजागरण अभियान को चलाया गया है। इसके लिए सबको एक विचर मंथम मे जाना चाहिए और जागृत उर्जा के साथ विकास के पथ पर आगे बढने के लिए संकल्प शक्ति के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
लेखक एवं प्रेषक- अमर नाथ साहु
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