नाग पंचमी

यह त्योहार प्रत्येक वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि को मानाया जाता है। इसमे नाग देवता की पूजा की जाती है। परंपरागत रुप से नाग देवता को दुध और लावा चढ़ाया जाता है। रात के सयम परिवार के सोने से पहले लावा और मिट्टी को मिलाकर घर मे फैलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता घर मे आते है और घर का निरिक्षण करते है। अच्छी व्यवस्था देखकर आशिर्वाद देते है। यह परंपरा काफी पुरानी है।

देव शक्ति को मानने के लिए ये दिन खास होता है। आस्था और श्राद्धा का अनुपन संयोग होता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति साप को कोई हानी नही पहुँचाये तो साप उसे नही काटता है। सांपो मे नाग का स्थान प्रमुख है। ऐसा माना जाता है कि वो सभी सर्पो से ज्यादा समझादार होते है। नाग देवता के प्रभाव से साप मानव पहुँच से दुर रहते है। जिससे भक्त की रक्षा होती है।

साप को काटने की दो विधा है एक है दैविकिय प्रभाव जिसमे साप को काटने जैसा प्रभाव दिखता है। इसके लक्षण मे जहर चहरता उतरता है यानि की लक्षण मे उतार चढ़ाव दिखाई परता है जिसको नाग शक्ति समपन्न भक्त के दावारा उपचारित करने से ठीक हो जाता है। इसकी अपनी एक व्यवस्था है। जिसमे मंत्र शक्ति को दोहराया जाता है और थाली को पीठ पर चिपकाया जाता है। तो थाली चिपक जाता है। जब पुरी तरह से विष शांत हो जाता है तो थाली पीठ से नही चिपकता है।

दुसरी तरफ है बास्तविक सर्प दंश इसका विष लगातार बढ़ता है। इसके लक्षण मे उतार चढ़ाव देखने को नही मिलता है। यहां पर रोगी को तुरंत चिकित्सीय इलाज की जरुरत होती है। जिससे की रोगी को समय से ठीक किया जा सके। बास्तविक जहरीला सर्प दंश होने पर झाड़ फूक पर भरोसा करना सही नही है। ऐसा देखा गया है कि जो भी व्यक्ति इस तरह के दावा करता है वो सर्प दंश वास्तविक साप से अलग होता है जिसको की पहचाने की जरुरत है।

नाग पूजा के बारे मे कई तरह की दंत कथा प्रचलित है। जिसके आधार पर लोग अपनी आस्था को बनाते है और पूजा करते है। एक बार ऐसा हुआ की एक भक्त अपने घर मे सांप की आने की आशंका व्यक्त की। उसके परिवार के दुसरे सदस्य ने साप को भगाने के लिए तेल पेरने के बाद निकलने वाल खड़ी को जला दिया जिससे की सांंप यहां नही आवे। इससे नाग देवता खफा हो गये उन्होने इसके लिए भक्त को डंदित किया। जब भक्त ने कारण पूछा तो समझाया गया कि हमने भक्त को सावधान किया है कि वरसात का समय आ गया है घर के साफ सुथरा रखे। रात के समय मे सतर्कता के साथ संभलकर चला करे जिससे उसकी सुरक्षा पुख्ता हो सके। किसी अनहोनी होने पर वो हमको दोषी ठहरायेगा इसलिे ये दृष्य दिखाया है। भक्त ने माफी मांगी और कहा कि ऐसा नही होगा। उसको समझया गया की यदि कोई सर्प दिखे तो पहले उसे वहां से वाहर निकल दे तथा उस स्थान को सुरक्षित करे ताकि दुवरा नही आवे। वो भक्त की रक्षा करते है लेकिन सावधानी जरुरी है।

नाग पंचमी को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनावे और अपनी सतर्कता भी रखे। विश्वास और सावधानी दोने मिलकर पुर्ण सुरक्षा के विचार को पुख्ता करते है। हमे आशा है की लोग अपनी विश्वास को गहराई देगें और पूजा को पुरी निष्ठा के साथ करेंगे।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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