
विश्व मानवतावादी दिवस (World Humanitarian Day)
जीवात्मा अपने मूल स्वभाव के साथ रहते हुए जिस तरह के आपसी भाईचारा, सहयोग, लगाव तथा आत्मियता के साथ रहते है उसको मानवतावादी विचारधारा कहते है। इस विचारधारा मे व्यक्ति एक दुसरे को हानी नही पहुँचाता है बल्की एक दुसरे को समझते हुए कुछ नया करने की कोशीश करता रहता है। क्योकि मानव का जीवन अल्प है। इसी अल्प आयू मे उसे जीवन के सारे आयामों को साधना होता है जीवन के हर रंग को समझना होता है। प्रकृति की विशालता, बिभिन्नता और शुषमा के साथ नवाचार भी होना होता है। यहां के जीवन मे कर्म के साथ ही सुख का जुड़ाव है जिसको करने के लिए प्रकृतिक के साथ हमेशा संधर्ष करना परता है।
इसके बावजूद कुछ खास लोग होतें है जो अपने जीवन को कुछ खास अंदाज मे जीते है। वे अपने सुख के लिए दुसरों का उपयोग करते है तथा क्रितिमता मे विश्वास रखते है। यही से आपसी संधर्ष की कहानी शुरु होती है। इसकी कोई सीमा नही है। जहां तक लोग एक दुसरे को हानी पहुंचा पाते है वहां तक के बाद स्थिरता आ जाती है फिर अशांती फैल जाती है। इसी बीच कुछ ऐसे भी लोग होते है जो अपनी शांत प्रिय विचारघारा के कारण सिमित दायरे मे रहकर अपना जीवन यापन करते है और सबसे अलग रहते है। ये लोग मानवतावादी कहलाते है क्योकि ये किसी का पक्षपात नही करते है। इसके इसी गुण के कारण इसको लोग बीच बचाव या फिर संधर्ष क्षेत्रों मे लोगो को सहायता पहुँचाने के लिए उपयोग करते है।
युद्ध महामारी और प्राकृतिक आपदा जैसे समय मे लोगो को सहयोग करने से मानवतावादी की आंतरिक शक्ति मे बृद्धी होती है और इनका जीवन खुशीयों से भर जाता है। इस प्रकार के लोगो के साथ यदी किसी प्रकार के घटना जाने अनजाने मे होती है तो बेहद दुखद क्षण होता है। क्योकी ये अपने खास स्वभाव के कारण किसी के भावना मे आ जाते है और गलफहमी का शिकार हो जाते है। इस तरह के विचार को दुर करने के लिए लोगो को जागरुक होना होगा। इस क्षेत्र मे काम करने वाले के प्रति लोगो के नजरीये मे बदलाव की जरुरत है जिससे की एक नवीन समाज की स्थापनी की जा सके।
संधर्ष के क्षेत्रों मे काम करने वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लोगों को अंतराष्ट्रीय कानुन के अनुसार आचरण करने से एक स्वस्थ्य विचार का संचार होता है जो एकता के सुत्र को बांधता है। इसके लिए सबको आगे आने चाहिए। सहायता कर्मियों की सुरक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए जिससे की लोग इस क्षेत्र मे बढ चढकर भाग ले सके। लोगो की जागरुकता एक अभियान बनकर लोगो को सशक्त बनायेगी और एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण होगा। व्यक्तिगत विचार घारा से उपर उठकर इस तरह के विचार के साथ जीने से सहयोग की कला एक आवाज बनकर उठेगी तो उच्च कोटी की समाज का निर्माण होगा जिससे फिर से सतयुग की शुरुआत हो सकती है।
मानवताबादी दिवस को मनाने का उदेश्य लोगो को जगरुक करना और इस तरह के लोगो की सुरक्षा को प्रथमिकता देना सर्वोपरी होना जरुरी है जिससे की सबका कल्याण हो। गुस्से मे व्यक्ति की शक्ति बढ जाती है और ज्ञान का हास हो जाता है जबकि उसका बास्तविकता कुछ और ही होती है। यही मानवतावादी लोग इस लम्बी खाई को कम करते है और शांती के स्थापना मे अपना अमूल्य योगदान देते है। इस अभियान को जनजागरण का रुप देकर इसकी रक्षा करना हमारा प्रधान कर्म होना चाहिए।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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