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मोबाइल वाली दुल्हन

मोबाइल वाली दुल्हन

मोबाइल वाली दुल्हन मोबाईल के इस युग मे लोगो को अपनी बात कहने का एक आसान साधन मिल गया है। अपने भाव को दुसरों तक पहुँचाने मे इसका प्रयोग तेजी के साथ हो रहा है। हमारी भाव का प्रारुप दुसरे भाव को शेयर करने तक सिमित रह गया है। कहीं न कहीं हमारी मुल भावना का लोप दिखाई दे रहा है। फिर भी हम आजकल के भागमभाग जिंदगी को मोबाईल से दुर नही कर सकते है। यहाँ मोबाईल वाली दुल्हन के रुप मे हम आजकल के जिंदगी के एक प्रारुप को व्यक्त करने की कोशीश कर रहे है आशा है…
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बिर्रो

बिर्रो

बिर्रो उमंग उल्लास मे बितता जीवन जब एक नये दौर मे पहुँचता है, तो उसका सुखद एहसास गहरा तथा व्यक्तिगत हो जाता है। इस कठीन परिस्थिती को समझ पाना आसान नही है। इसको लिए खास तौर पर ध्यान देने की जरुरत होती है, जिससे की इसकी प्रखरता का अनुमान लगाया जा सके। आजकल बहुत कम लोग होते है, जो ऐसी उड़ान का आनन्द लेना पसंद करते है। अधिकांश लोग तो शोर सरावा मे इस तरह खो जाते है कि उनको वास्तविकता का एहसास ही नही होता है। वह लगतार ही यह खोजता रहता है कि आखिर इस छनिक एहसास का…
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नफरत का फल

नफरत का फल

नफरत का फल नफरत व्यक्ति को अंधा बना देता है, व्यक्ति की मानसिक स्थिति पुरी तरह बदल जाती है। वह अपनी बैचारिक सीमा के बाहर नही जा पाता है। उस सीमा के बाहर जाकर सोचना उसके लिए अत्यंत दुखद होता है। दुख के इस बंधन के पार जाकर सोचना तथा उसका निदान निकालना नही चाहता है क्योकि वह अपनी वर्तमान सोच को ही अंतिम सोच मान लेता है। व्यक्ति पुरी घटना चक्र को कभी अनजान बनकर नही सोचता है, बल्कि वह उसका हिस्सा बनकर रह जाता है। आनेवाली समस्या के जानकर होने के वाबजुद वह अपनी सही हल नही निकाल…
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दहेज

दहेज

दहेज दहेज का बोलबाला हमेशा से रहा है। शायद ही इसको पुर्ण रुप से समाप्त किया जा सके। दहेज लेने तथा देने की प्रबृति दोनो तरफ रहती है। इसी से व्यक्ति के गुण दोष का पता भी चलता है। एक चलन भी लोगो को प्रभावित करता है। कोई धन लेकर दुल्हन से समझौता करता है तो कोई दुल्हन लेकर धन से समझौता करता है तो कोई निःस्वार्थ भाव से अपने को धन्य करता है। इस बिशाल जनमानस के बिच रंग बिरंगे रुप देखने को मिलता है। हमारा उदेश्य ऐसे समाज की स्थापना का रहता है जो एक स्वस्थ्य परम्परा का…
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गुरुर

गुरुर

गुरुर खुद पर गुरुर का होना बड़ी बात है। यदि व्यक्ति समय के साथ चलते हुए बड़े निष्ठा के साथ कार्य करते हुए आगे बढ़ता है और पुरी ततपरता के साथ लगा हुआ है तो कहता है कि हमे खुद पे गुरुर है। इसका अभिप्रय यह होता है कि व्यक्ति मे कार्य को सही से करते हुए आगे बढ़ने के प्रति सतर्क है। वह सावधानी के विधान को सही से जानता है। उसके कार्य करने की शैली अगल है जिससे की वह इतने विश्वास के साथ ये बात कह रहा है। गुरुर और घमंड मे अंतर होता है। घमंड ये…
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