वर्षगाठ

मामा जी की 45 वाँ एनिवर्षरी

मामा जी की 45 वाँ एनिवर्षरी

मामा जी की 45 वॉ एनिवर्षरी एनिवर्शरी को मनाने का सामान्य प्रचलन भारत मे नही है। फिर भी समय के साथ लोगो को इसमे दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। तनाव भरी जीवन के आजकल के इस दौर मे लोगो को कुछ समय मिल जाता है जब लोग सब कुछ भुलाकर अपनी एक नयी ढं मे रंग भर लेते है। खुशीयोँ को ताजा करने का यह चलन स्वभाविक रुप से बड़ा आनन्दायक समय होता है। छनभंगुर जीवन के एक-एक वर्ष की खुशीयाों का सौगात अपनो के साथ बांटनाा एक अलग ही सुखद एहसास देता है।          आगे बढ़ते जीवन की नइया…
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दिदी को 26 वाँ मैरेज एनिवर्शरी

दिदी को 26 वाँ मैरेज एनिवर्शरी

दिदी का 26 वाँ मैरेज-एनिवर्शरी लेख जीवन के आधी पड़ाव पर यदि जीवनसाथी साथ छोड़ जाये तो आने वाले दिन का अनुमान लगाना कठीन होता है। समय के साथ जीने की काल को सिखना पड़ता है। उपलब्ध संसाधन का उपयोग करते हुए जीवन निर्वाह करना बहुत ही कठीन होता है। जीवनसाथी के गुजरने के बाद के पहले शादी के साल गिरह पर अपने बेदना को भरोसा से सवांरती एक नारी की आपबीती की कहानी को कहता यह कविता हमारे अंतःकरण को छु जाता है। मानव को यदि भविश्य का ज्ञान होता तो वह कोई न कोई जतन जरुर कर लेता…
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