Month: May 2022

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत    यह व्रत नारी स्वयं को सुहागन बनाये रखने के लिए करती है। सुहागन स्त्री को समाजिक तथा मानसिक दोनो का समायोजन पति के द्वारा ही संभव होता है। नारी के मान सम्मान की रक्षा का प्रभाव पुरुष पर ही होता है। अपने पति को समर्पित पत्नी का जीवन आशा और बिश्वास के साथ आगे बढ़ता जाता है। शारीर सौन्दैर्य घटता है तथा विश्वास और टटस्थता बढ़ती जाती है। स्त्री की संवेदना अपने पती के प्रती इतना सुदृढ़ हो जाता है कि वह अपने पति के सिवाय किसी के प्रती सोचना भी पसंद नही करती है। कहते…
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मुर्ती पुजा

मुर्ती पुजा                                                      मुर्ती पुजा का इतिहास बहुत पुराना है। मानव ने जबसे जीवन को समझना शुरु किया तभी से उन्होने चित्र रुप का निरुपण किया। उसके भय को एक सहारे की जरुरत थी। यही सहारा मुर्ति के पुजा का स्थान सुनिश्चित किया। मानव के बिकाश की यात्रा का इतिहास आज के मानव को बुद्दिमान सावित करता है। लेकिन मुल बिषय डर आज भी है। डर का नियोजन समय के साथ तथा व्यक्ति दर व्यक्ति अलग - अलग होता है, तथा किया जाने वाला उपाय भी अलग होता है। लेकिन धार्मिक मान्यता हमारे अंदर जो भाव पैदा करता है, उससे…
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युद्ध से धर्म

युद्ध से धर्म

युद्द से धर्म गीता मे कहा गया है कि युद्द अंतिम बिकल्प है। यदी शांति के सारे उपाय विफल हो जाय तो युद्द के तरफ जाना चाहिए। स्थापित परंपरा के अनुरुप हमे आगे बढ़कर मानव की सेवा भाव के प्रति आरुढ़ रहना चाहिए। यदि इसमे अवरोध है तो इसका प्रतिकार हो तथा युद्ध भी यदि करना परे तो पिछे नही हटना चाहिए। इतिहास मे युद्ध की अनेको कहानी मिलती है। किस्से कहानीयों मे भी हम युद्द की गाथा सुनते है। मनोरंजन मे होने वाले आनन्द भी एक ऐसी ही गाथा से गुजरता है। चार्लस डार्विन ने कहा था अस्तित्व के…
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