Bhakti

आरती छठी माई की

आरती छठी माई की

ठठी मईया की आरती ठठी मईया की आरती ठठी मईया की आरती छठ माई की आरती छठ मईया की आरती हमारी चेतना को जगाकर हमारे भाव को स्पष्ट रुप से चित्रण करती है। जिससे माता के साक्षात दर्शन का भान होता है। दिव्य रुप माता को अपने बिचार मे उतारना एक कठीन कार्य है। हमारे भाव की अभिव्यक्ति से एक आभा मंडल बनता है, जो हमारे चारो ओर एक बृत बनाकर हमे उर्जावान करता है। हमारे द्वारा उच्चारित शब्द हमे नियंत्रित करतें है। हमारी शब्दिक उच्च उर्जा शक्ति का जब शब्द से संचार होता है, तो दिव्य रुप माँ को…
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आनन्द चतुर्दशी

आनन्द चतुर्दशी

आनन्द चतुर्दशी यह धागों का त्योहार है। इसमे भगवान बिष्णु की पुजा की जाती है। भगवान बिष्णु को प्रतिपालक कहा जाता है। वे जीवआत्मा के पुरे कर्म को नियंत्रित करते है। एक प्रभावी कर्म को करने के लिए एक प्रेरणा का होना होता है जिससे जीवन को सबलता मिलता है। जीव के जीवन का यह सबसे हमत्वपुर्ण काल जन्म से मृत्यु तक का समय होता है। इसा समय मे अपने कर्मो के द्वारा अपने आत्मा को एक शक्तिशाली, प्रभावी और उर्जवान योग प्राप्त करना होता है। इसी से भगवान विष्णु की पुजा की जाती है तथा संकल्प के रुप मे…
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अखण्ड जाप

अखण्ड जाप

अखण्ड जाप   यूँ तो जाप करना हमेशा से लाभकारी रहा है, लेकिन समय के साथ बदलती समाजिक परिवेश ने एक कोलाहल का माहौल बना दिया है। हमारा अस्थिर मन एक समस्या का हल निकालता है, कि वह दुसरे समस्या में  उलझ जाता है। इसका बैधानिक कारण है, मन का स्वस्थ्य नहीं होना। हमारी चाहत तथा उसका समायोजन ही एक समस्या है। हम एक कार्य कर ही रहे है, कि दुसरे के प्रती हमारा ध्यानाकर्षण खिंच जाता है। हमारा नजरीया यहां भी बनने लगता है। इस तरह हम उलझते चले जाते है।           किसी एक कार्य में स्थिर रहना तथा…
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गुरु पुर्णिमा

गुरु पुर्णिमा

गुरु पुर्णिमा   गुरु मे गुरुत्व होता है। यह गुरुत्व ही उनकी खास बिशेषता की परियायक है। उनके साधना से जो लक्ष्य की प्राप्ती उनको होती है वह सदा ही अनुकरणिय होता है। जब हम गुरु की शरणगत होकर कार्य आरम्भ करते है तो गुरू का मार्गदर्शण हमे मिलता है। गुरु से निर्देशित हमारेजीवन का ओ मार्ग सुगम हो जाता है जो गुरु के निर्देश मे किया जाता है। इसके आगे के मार्ग की सुगमता हमारी कार्य अनुशासन हमे सीखाती है जिसमे हमे गुरु की साधना के अनुभव हमारी राह को आसान बना देता है।        जीवन मे उदेश्य के…
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चौथी सावन सोमवारी

चौथी सावन सोमवारी

सावन की चौथी सोमवारी भगवान शिव को पुष्प अर्पित करते हुए मन मे जो उत्कृष्ट भाव बनता है, उस भाव को दर्शाता यह कविता हमें साधना तथा भक्ति के मार्ग को सशक्त करता है। भाव ही भगवत्व प्राप्ति का उत्तम स्त्रोत है। इसलिए भाव प्रधान यह पुजा आज पुष्प की प्रधानता को दर्शाता है। पुष्प एक वस्तु मात्र है, लेकिन इसके प्रति जो भाव मन मे बनता है, इसी से इसकी प्रधानता को उत्तम मानते है। भाव के कारण ही भगवान भक्त के करीव होते है। एक सशक्त भाव का साधक होना बहुत जरुरी है। यह भाव अनादि भी होता…
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आरती लक्ष्मी जी की

आरती लक्ष्मी जी की

आरती लक्ष्मी जी की लक्ष्मी माता की नवीन आरती हमें जीवन की गहराई मे जाकर जीवन के अती महत्वपुर्ण प्रसंग को उधृत करते हुए एक भाव पुर्ण आवाह्न को व्यक्त करता है। माता का साक्षात प्रकटीकरण के भाव के साथ आरती का गायन हमारे मन को तरंगित करते हुए हमे एक लक्ष्य की आगे बढ्ने का प्रेरणा देता है। कुछ लोगो का मानना है कि सारे कार्यो का मूल भाव धन ही है जिससे सारे सुखो को पाया जा सकता है, लेकिन यह पुर्ण सत्य नही जान पड़ता है। पुर्ण सत्य तो व्यक्ति का गुणात्मक मान होता है जिसका मुल्यांकन…
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