जीत के राही

Jit ke rahi

जीत के राह बनाने वाले को आँखों की भाषा समझ मे आती है यानी की बॉडी लैग्वेज या शरीर की भावनात्मक संकेतिक भाषा की वारीकी समझ होती है। अपने इस गुण के कारण वह परिस्थिती को समझ कर अपनी तैयारी उसी के अनुसार करते हुए तैयार हो जाते है। इसके कारण वह हर मुश्किल को समाना करने की कला जान जाता है। जिसके कारण उसके विश्वास मे उतरोत्तर विकास होता है।

रास्ते मे बाधाओ की परेशानी हो सकती है जो उसे व्यथित नही करता है। वल्कि कार्य का मुल्यांकन कार्य के साथ करते हुए अपनी सतर्कता को मजबुत बना लेते है। जबकी उसे उस कार्य को करते हुए खुशी महसुस होती है। जहां अनजापन होता है कहा जाता है कि वहां काम करना मुश्किल होता है। लेकिन इस तरह के व्यक्ति वहां भी अपनी पहचान आसानी से बना लेतें हैऔर कार्य को जीत की ओर ले जाते है। ये इस कला के धनी होते है।

जीत के लिए गुण और गुणी दोनो की जरुरत होती है इसलिए ये दोस्त और उससे नजदीको बनाने के धनी होते है। ये बिकट परिस्थिती मे भी अपनी जीत पाने के लिए प्रयासरत रहते है जबतक की इनको ये विश्वास न हो जाये की कार्य की पुर्णता होना जायेगी।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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