राष्ट्रीय मेकिंग लाइफ ब्यूटीफुल दिवस

आजकल की भागमभाग जीन्दगी मे चुनौतीयां काफी बढ़ गई है। इन चुनौतियों के बीच समय और कार्य का समंजस्य स्थापित करना कठीन हो रहा है। जरुरत बहुत बढ़ गई है और आमदनी उस अनुपात मे लोगों को नही हो रही है जिससे कठीनाईयां आ रही है। इस पुरी प्रक्रिय का असर व्यक्ति के समान्य जीवन पर रहा है।

 जीवन को सुन्दर बनाने के लिए समय, कार्य, खान-पान के साथ स्वास्थ्य की भी समुचित व्यवस्था करने की जरुरत है। इस कार्य को व्यवहार मे लाने के लिए आज के दिन को विशेष रुप से मानाय जा रहा है। जिससे की समाजिक जागरुकता का इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।

 सब जगह की परिस्थिति एक जैसी नही है। इसलिए यहां का खान-पान रहन-सहन भेष-भुषा अलग-अलग है। इसके वहां के परिस्थिति के हिसाव से सुन्दर बनाने की जरुरत है जिससे की एक स्वस्थ्य समाजिक व्यवस्था को बनाया जा सके। इस कार्य के लिए विशेष ध्याकर्षण की जरुरत है।

समाज मे विभिन्न स्तर के लोग रहते है जो अपने हिसाव से जीवन यापन करते है। इसके स्तर के सुधार के साथ इसके एक सुनियोजित व्यवस्था के हिस्सा बनने मे इसको आसानी होगी। आजकल बहुत सारी विमारीयां जीवन स्तर से जुड़ी हुई है। जैसे की बीपी – उच्च स्तर के खान-पान करना लेकिन कार्य नही करने से शरीर मे वसा का जमा होना शुरु हो जाता है जो धिरे-धिरे उच्च रक्त चाप होने का कारण बनता है।

डाईवेटीज भी खान-पान पर सही रुप से ध्यान नही देने के कारण होता है। मोटापा बढ़ने के साथ ही एडीपोज उत्तक के कार्य मे बदलाव हो जाता है जिसके कारण डाइबेटीज होने की शिकायत होती है। वैसे अभी चीनी को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। थाइरोआइड की सिकायत भी पाचन क्रिया मे गरवरी के कारण होने वाले शारीरिक बदलाव के बाद आती है। यदि खान-पान को सही किया जाय तो इससे बचा जा सकता है। एक आकर्षक शरीर के लिए योग व्यवयाम करना तथा अपने भोजन पर नियंत्रण रखना जरुरी है। इसके लिए हमे आज के दिन को विशेष रुप से विचार करने की जरुरत है।

खुद को सुन्दर बनाने के लिए एक अभियान जब चलता है तो लोग स्वभाव वस भी नियमित हो जाते है और यह व्यवहार का हिस्सा बन जाता है। जवकि कुछ खास लोग जब इस कार्य को करते है तो वे स्वयं तक सिमित रह जाते है और उनके लिए लोगो के समझना मुश्किल हो जाता है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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