
विश्व मरुस्थलीकरण और सुखा रोकथाम दिवस
विकाश के आधुनिक मॉडल तेजी से आकार लेता जा रहा है। इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे है। ग्लोबल वार्मिग से जहां पर वर्षा प्रभावित हुई है वही पर इसका बुरा प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ा है। वर्षा लगातार प्रभावित हो रही है मौसम की वारिश की भी वितरण वहुत प्रभावित हुआ है। अधिक उर्वरक का उपयोग करने के कारण लगातार खेत की मिट्टी प्रभावित हो रही है। जिससे भूमि बंजर बनती जा रही है। पेड़ पैधे जहां वर्षा जल को संरक्षित रखते है वही पर वर्षा बादल बनाने मे भी बड़ी भूमिका निभाते है। जहां पहले बन प्राप्त मात्रा मे थे वही पर आज लोग अपने उपयोग के लिए लागातार इसको क्षति पहुँचा रहे है जिससे वर्षा वहुत प्रभावति हुई है। वर्षा के प्रभावित होने से धरती की हरीयाली भी प्रभावित हुई है। जिसके कारण तापमान मे भी बदलाव हुआ है और गर्मी भी बहुत तेज परने लगी है।
तेज गर्मी के कारण हवा गर्म होकर उपर उठ जाती है जिससे की उस स्थान पर वायू दाव की कमी हो जाती है तो दुसरे स्थान से वहां के लिए हवा चलती है इसके कारण चक्रवात उत्पन्न हो रहे है। जो एक स्थान की मिट्टी को दुसरे स्थान तक उड़ा ले जाती है। इस तरह से मरुस्थलीकरण का विस्तार हो रहा है। वर्षा कम होने के कारण नदी-नाले भी सुख रहे है। तालाब मे पानी की कमी भी एक बड़ी समस्या लेकर आ रही है क्योकी इसके कारण भूतल की पानी का स्तर भी नीचा जा रहा है। जिससे पिने के पानी की भी कमी हो गई है। वहीं पर खेती बारी के लिए भी पानी की कमी का समना करना पड़ रहा है जिससे की फसल की उत्पादता प्रभावित हो रहा है।
औद्योगिक विकाश के साथ ही इसके दुष्परिणाम को नजर अंदाज कर दिया जाता है क्योकी आगे बढ़ने की अंधी दौर मे सबकोई आगे निकलने की कोशीश मे रहता है। सबको हवा पानी और आवास मिले इसको लेकरके एक विश्व स्तर पर प्रयास की जरुरत है जिससे की विकाश की इस अंधी दौर को विराम मिले। इसके लिए 17 जून के दिन को विशेष माना गया है जिसमे मरुस्थलिकरण और सुखा के विषय पर गंभीर चर्चा की जानी है इससे समाजिक जागरुकता के साथ वैश्विक जिम्मेदारी भी बढ़ेगी और एक नवीन विकाश की प्रक्रिया को स्वीकार किया जायेगा।
विकाश के वैश्विक मॉडल को प्रकृतिक रुप देने के लिए इसके बिभिन्न पहलू को साधना भी जरुरी है जिससे की मानव के जीवन प्रत्याशा को बढाया जा सके। प्रदुषण एक समस्या बन कर उभरी है इसके कारण लोगो को लगातार विलाशिता के तरफ बढना है जो कि नियमो को तकपर रखकर किया जाता है। इस तरह के मानसिकता को रोकने की जरुरत है जिससे की वास्तविक जीवन को संरक्षण मिले। हम जीवन के उच्च आदार्श को स्थापित करने वाले विचार को सम्मान करते है और आशा करते है कि विकाश के उच्च मानडंड को लोग स्थापित करने मे आपना बहुमुल्य योगदान देंगे।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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