
विश्व बृद्ध दुर्व्यवहार जागरुकता दिवस
बढ़ती बैश्विक गतिविधी के बीच परिवार छोटे-छोटे टुकड़ो मे बटने लगा है। इसका कारण आय का असमान वितरण है। आय के इस व्यवस्था से असंतोष की भावना पैदा होती है। यही असंतोष आपसी विवाद का कारण बनता है और परिवारीक बिखराव के रुप मे सामने आता है। व्यापार की बढ़ती प्रतिस्वर्धा के कारण लोगो का एक स्थान से दुसरे स्थान तक प्रवास करना तथा सिमित जगह मे रहना भी एक परेशानी का कारण बन रहा है। इसी आपाधापी के बीच बड़े बुजुर्ग की परेशानी बढ़ने लगी है। उसके रहन-सहन, खान-पान पर पहले के समय की तरह मुख्य फोकस अब नही रहता है। आत्म केन्द्रीत विचार घारा भी इस व्यवहार मे महत्वपुर्ण भूमिका निभाता है।
बड़े बुर्जुर्ग को इस बात का मलाल रहता है कि उनकी पुरी संपत्ती उसकी है। उन्होने जिस व्यवहार और मेहनत से जो कुछ भी अर्जित किया है उसके प्रत्येक व्यवस्था का वो साक्षी है। उसके मन और चित पर वो भाव अब भी बना रहता है जबकि अब वो उसको सहेजने के काविल नही है। बढ़ते परीवार के साथ बढ़ती जुरुरते और घटते आमदनी के बीच समानजस्य स्थापित करना मुश्किल हो रहा है। हलांकि अभी भी बहुत सारे लोग है जो अपनी पुरानी व्यवस्था पर कायम है और समाज के लिए एक मिशाल बनकर कार्य कर रहे है। लेकिन पुराने समय की तरह लोगों के बीच इस तरह के भाव कमजोर पर रहे है।
बड़े बुजुर्ग के बदलते मानसिक व्यवहार और धटती उम्र के साथ बढ़ती उनकी समस्या को हल करना आसान नही होता है। इसके लिए खास तरह के व्यवहार और व्यवस्था को बनाना परता है। यह खास व्यवस्था व्यक्ति के व्यक्तिगत मनोभाव पर निर्भर करता है। व्यवहार करने वाले की प्रकृति यदी सुदृढ़ और उन्नत विचार का है तो सब ठीक रहता है वरना सबकुछ उलट-पुलटा हो जाता है।
बड़े बुजुर्ग के साथ अच्छा व्यवहार करते हुए एक उन्नत परिवारीक विचारधारा को बनाये रखना एक आदर्श परिवार का हिस्सा होता है जो की उसके समाजिक उत्थान का परिचायक है। बृद्ध के सेवा और उनके आशिर्वाद को विशेष महत्व देने के उदेश्य से आज का दिन बहुत खास है। जीवन के अंतिम बेला मे सब व्यक्ति को आना होता है जहां पर जीवन पुरी तरह से दुसरों पर आश्रित हो जाता है। यही पर अपने अर्जित किये हुए व्यवस्था काम आती है। जीवन के अंतिम छण को अच्छी तरह से निर्वाह करने वाले परिवार को आज भी समाज उच्च स्थान दे रहा है।
बृद्ध के हो साथ अच्छा व्यवहार और जीवने के ये अंतीम समय पुरी निष्ठा और व्यवस्था के साथ जीवन यापन हो तो पुरा जीवन एक योग बन जाता है। इसके लिए संसार को एक संदेश देने और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को दिम्मेदारी का एहसास करवाने के साथ जरुरत मंद को सहायता पहुँचाने के उदेश्य से आज का दिन बहुत खास है। हम समाज को एक आदर्श परिवार बनते हुए जीवन के इस अंतिम अवस्था को सुखद बनाने की कामना करते है और आशा करते है कि इसके लिए लोग आगे आयेंगे और अपनी-अपनी प्रतिवद्धता व्यक्त करेंगें।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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