
विश्व शरणार्थी दिवस
शरणार्थी मतलब होता है शरण मांगने वाला। शरण मांगने वाला व्यक्ति का वस्तुतः कोई अधिकार नही होता है। बस मानवता के आधार पर उसको शरण देने की बात होती है। ऐसा होता है कि शरणार्थी को कुछ दिन ठहर जाने के बाद उसको अपने स्वस्थान पर लैट जाना होता है जिससे की शरण देने वाले को वो बोझ नही बने। देश के स्तर पर सोचें तो इस तरह की समस्या तब आती है जब घरेलू हिंसा होने लगती है। कनुन की स्थिती बिगर जाती है। आपराध को नियंत्रण करना वहां के प्रशासनिक स्तर की बात नही होती है। जानमान की भारी छती होती है। किसी को भी सुरक्षित रहने की कोई जिम्मेदारी नही लेता है। इस स्थिती मे स्थानिय लोग जो खुद को असहाय समझते है वहां से सुरक्षित जगह पर चले जाते है। जब माहौल सही होता है तो पुनः उसकी वापसी होती है।
शरणार्थी को रखने के लिए स्थाई और अस्थाई तौर पर व्यवस्था की जाती है। उसके लिए समुचित व्यवस्था की जाती है जिससे की उसके किसी प्रकार की हानी ना हो। जब किसी देश मे आराजगकता की स्थिती लम्बी हो जाती है तो शरणार्थी शरण देने वाले के लिए एक वोझ बन जाती है। शरणार्थी धिरे-धिरे उस देश मे फैल जाते है तथा वहां की समाजिक परिवेश को बदलने लगते है। रोजगार के साथ ही वहां की आर्थिक तथा समाजतिक मनोभाव मे भी बदलाव आने लगता है। कभी-कभी शरणर्थी की गतिविधी इतनी बढ़ जाती है कि उसको नियंत्रण करना एक जोखिम भरा कार्य हो जाता है। इसके लिए वहां कई तरह की अनियंत्रित गतिविधी बन जाती है। इससे शरणार्थी की समस्या के रुप मे देखा जाता है।
कई बार ऐसा होता है कि लोग अपने देश वापस जाना ही नही चाहते है क्योकि वहां की हालात को सुधारना मुश्किल होता है क्योकी वहां की आर्थिक और राजनितिक गतिविधी वहुत ही दैनिए स्तर पर पहुँच जाती है। इस स्तिथी मे स्थानीय सरकार के द्वारा कई तरह के कदम उठाये जाते है जिससे की समस्या कोई विकराल रुप ना पकड़े। शरनार्थी पर राजनिती भी शुरु हो जाती है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा वैश्विक स्तर पर हो रहे इस तरह के समस्या के लिए एक नियम बनाया गया है जिससे शरणार्थी को सुरक्षा तथा उसके मानवता की रक्षा हो सके। फिर भी कई तरह की समस्या का समाना करना परता है। इसी विषय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समझने के लिए 20 जून के दिन को विशेष धोषित किया गया है जिससे की लोगो के बीच मे जनजागरण किया जाय। इससे शरणलेने वाले तथा शरण देने वाले दोनो को एक सुखद स्थिती का सामना करना परेगा। हमे आशा है कि इस तरह की कोशीश कामयब होगी और शरणार्थी की समस्या का मानवीय आधार पर समुचित हल निकल आयेगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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