
संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के उन्मुलन के लिए अतर्राष्ट्रीय दिवस
International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict
संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा 19 जून 2015 को इस दिवस की स्थापना की गई। इसका उदेश्य युद्धरत देश या ऐसा देश जहां पर दुसरे देश का शासन हो गया है और जहां पर लोकतंत्र नही है वहां पर महिलाओं पर होने वाले यौंन हिंसा को रोकना। विशेषकर यौन हिंसा के मामले को लेकरके ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत है। इस तरह के विचारधारा को संचालित होने से विश्व स्तर पर लोगों की संवेदनशीलता बढ़ेगी तो युद्धरत देश पर दवाव परेगा की वो अनैतिक कार्य को बढावा ना दें। वे ऐसे लोगों पर कारवाई करे जो इस तरह के कार्य के दोषी पाये जाते है जिससे की समाजिक समरसता को उच्च स्थान मिले।
सीमा बिवाद एक पुरानी समस्या है। जब शक्ति संतुलन विगरता है तो इस तरह के समस्या सामने आती है। ताकतवर देश अपनी बात को मनबाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते है लेकिन विश्व स्तर पर युद्ध के लिए जो मानडंड बने है उसका पालन करना जरुरी होता है। चुकी युद्ध के समय आम जनता का पुरा देखभाल सेना के हवाले होता है इसलिए सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। शासन की पुरी तरह से नियंत्रण स्थापित होने और नयी व्यवस्था को संचालन होने तक सैनिक ही सुरक्षा की गारंटी देते है इसलिए इसकी जिम्मदारी भी उसकी होती है। यदि किसी के द्वरा यौन उतप्रीड़न की बात सामने आती तो उसकी बैश्विक स्तर पर निंदा होनी चाहिए और संबंधित व्यक्ति दंड के भागी होने चाहिए। इस तरह के व्यवस्था से मानव समाज को उच्च आदर्श स्थापित होगा और जीवन जीने के मौलिक अधिकार की रक्षा होगी।
लोग भावावेश मे आकरके अपने पराये मे भेदभाव करने लगते है जिससे हिंसा को बढ़वा मिलता है। यौन हिसा का मतलब है शारीरिक शोषन के बाद उसकी हत्या कर देना जिससे की उसके बारे मे सारी बातें ही समाप्त हो जाय जिससे आरोप की कोई बजह नही रहे। जबकि इस तरह की समस्या का कोई न कोई साक्षी होता है जो ये समझता है कि जिन्होने यहां पर शासन स्थापित किया उसकी मानसिकता कैसी थी। यहीं से उसके दिल मे एक नफरत की भाव जागृत होता है। यही भाव उसके मन को झकझोरता है और फिर एक नये समाज का निर्माण होता है जो बदले की आग को अपने अंदर छिपाये एक नये युद्ध की ओर अग्रसर होता है। फिर वही कहानी दोहराई जाती है जो पहले से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इस दोनो की परिणाम मे महिलायें को ही आत्म सम्मान और आवरु से नीचा देखना परता है।
ये दिवस जगरुकता को बढ़ावा देता है। यह इस तरह की घटना के प्रति समाज को सजग करता है। यौन हिंसा को रोकने के लिए एक सार्थक प्रयास मानव मन को झकझोर देता है। जो आगे चलकर एक अभियान का भाग बनेगा। यही भाव लोगो को एक दुसरे से जोड़ेगा। अंतर्रास्ट्रीय दवाव और बदनामी से बचने के लिए लोग टटस्थ निती अपनायेगें और एक उच्च सोच वाले समाज का निर्माण होगा जो उच्च आदर्श स्थापित करेगा। हम उच्च आदर्श स्थापित करने वाले समाज की स्थापना की कामना करते है और आशा करते है कि यह अभियान सार्थक होगा और जीवन में उच्च कोटी के मानडंड स्थापित होगी।
लेखक एवं प्रषकः अमर नाथ साहु
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