राष्ट्रीय पुत्र और पुत्री दिवस (National Day Son and Daughter)
मात-पिता और बच्चों के बीच विशेष रिस्ते, प्रेम और जुड़ाव को सम्मान करने के लिए इस दिन को विशेष बनाया गया है। बच्चो से साथ प्यार जताना और गुणवत्तापुर्ण समय बिताने से बच्चो के संस्कार मे उत्तरोत्तर विकाश होता है। उनके दिमाग के खालीपन को एक विचार शक्ति मिलती है और वो कार्य के प्रति उन्नमुख हो जाते है। बच्चो के अपने दोस्त उसके अपने विचार के होते है जिसको भी एक सही कार्य के लिए मार्गदर्शन की जरुरत होती है। यह कार्य माता-पिता से अच्छा और कौन कर सकता है। बच्चे शुरुआत मे माता-पिता के करीव होते है। उनका हर आवभाव को वो सिखते है और अपने अंदर आत्मसात करते है। इसके लिए उनके साथ समय बिताना जरुरी होता है।
बेटा-बटी के महत्व को रेखांकित करना और उनके महत्व को परिवार मे सराहने से उनका मनोबल उच्च होता है जिससे कार्य करने के प्रति उसका विचार सुदृढ़ होता है। बच्चो के द्वारा किये कार्य को बरीकी से देखना और उसको प्रोत्साहित करना जरुरी है जिससे की उसके मनोभाव पर बुरा असर नही परे। जीवने को संतुलित और संयमित के सहारे जीना होता है। इस कला को भी सिखना होता है। आजकल के माहैल मे बच्चो के मोबाईल और दुसरी गतिविधी मे बीजी हो जाते है जिससे उसका सोचने और समझने के भाव बदल जाते है जिससे उसका रास्ता अलग हो जाता है। बच्चो के इसी भाव को नियंत्रण करने के लिए बच्चो के साथ समय बिताने को प्राथमिकता दिया गया है।
बच्चो के सपनों को जानना और उसके प्रेरणा के स्त्रोत के बारे मे समझना जरुरी होता है। उसके खाली दिमाग मे बिचार की शक्ति को प्रतिरोपित करना होता है। उसके बिचार यदी उपयुक्त नही है तो उसे समझाने की जरुरत होती है। समझाने मे गुस्सा करने से नही बल्की बार-बार एक ही विचार को समय समय पर रखने से विचार स्थापित हो जाता है। बच्चो को आपनी बात कहने का एक दोस्त भी मिल जाता है जो उसके मानसिक चंचलता दुर करता है और उसके दिमाग को शांति देता है।
परिवार से साथ मिलकर अच्छी गतिविधी को करना और सैर सपाटा का प्लान बनाना जिससे उसके जिज्ञासा को एक उपयुक्त समय मिले जिससे की उसकी जानकरी को समय के साथ पुख्ता किया जा सके। बच्चो के द्वारा किया जाने वाला प्रश्न उसके दिमाग को समझने की शक्ति देता है। इसके लिए यह जरुरी है कि उसके प्रश्न का उपयुक्त उत्तर दिया जाय बाद वांकी कार्य वो स्वयं कर लेता है। समय के साथ उसके दिमाग के विचार नवीनिकृत होते रहते है। वो अवलोकन से पुराने विचार को नये विचार से स्थानांतरित करते रहता है। जरुरी है कि पहले सार्थक और सही विचार दिया जाय। इस विचार से ही उसका संस्कार बनेगा और वो जीवन पथ पर अग्रसर होगा।
हम बहुत तो नही बदल सकते है पर जो बदल सकते है बही उसके जीवन की बनीयाद रखेगा और अपने माता पिता के प्रति जीवन भर सम्मान के साथ सहयोग के लिए तैयार रहेगा। 11 अगस्त के खास दिन को इसी के लिए नियोजित किया गया है जिससे की समाज मे ये विचार संपादित हो और एक उन्नत समाज के निर्माण मे एक महत्वपुर्ण कदम बढ़ाया जा सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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