भारत छोड़ो आन्दोलन

अंग्रेजों ने अपने निहित स्वार्थ को साधने को लेकरके जो आर्थिक और राजनैतिक दमन की निति आपनायी इसका व्यापक आसर होने लगा। हद तो तब हो गई जब बिना भारतीयो की राय लिये द्वीतिय विश्व युद्ध मे भारत को झोंकने लगा। भारतीयों को संतुष्ट करने के लिए बना क्रिप्स मिशन की असफलता ने भी इसको हवा दी। इसके कारण भारतीयो मे राजनैतिक और आर्थिक असंतोष बढ़ने लगा। शिर्ष नेताओं की गिरीफ्तारी हुई इसके कारण स्वतः ही स्फुर्त गति से आंन्दोलन आगे बढ़ने लगा और पुरे देश मे फैल गया। कुछ नेताओं ने छुपकार आंदोलन को चलाया और गुप्त रोडियो स्टेशन से जानकारी भी प्रसित किया। इसी मे माहात्मा गांधी ने करो या मरो का नाया दिया जो आन्दोलन की जयधोष बन गई और पुरा देश एक सुर मे एक आवाज से अंग्रेजो को बाहन निकलने के अभियान का हिस्सा बना।

इसको ही अगस्त क्रांत कहा जाता है। इस आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार की निंव हिला दी। इसके बाद ही ये तय हो गया की आब स्वतंत्रता दुर नही है। भारत जैसे शांति प्रिय देश मे जहां वशुदैव कुटुम्बकम का नरा दिया गया। जहां अहिंसा परमोधर्मः कहा गया। जिसने मानव विकास मे कई आयाम जोड़े वहां के जातिगत व्यवस्था और धार्मीक स्वतंत्रता के कारण विखरे हुए समाज को तोड़कर एक गुलाम की जिंदगी जीने को मजबुर किया गया। यहां की उन्नत मानसिकता को जागने मे काफी समय लगा लेकिन जब जगा तो एक आन्दोलन का ऐसा रुप लिया की ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिल गई और अंततः स्वतंत्रता मिल गई।

भारत जैसे विशाल देश मे जहां की भौगोलिक परिस्थीतीयां अलग-अलग है। जहां की भेष-भुषा बालीयां भिन्न है इसको एक सुत्र मे बांधकर रखना कठीन कार्य है। लेकिन इतिहास इस बात का गहाव है की अखण्ड भारत कितना विशाल और विकसित था। भारत के विकास ने जिस व्यवस्था को जन्म दिया और जिसके कारण पतन का समय देखना परा उसको इस आंन्दोलन ने नयी जान दी और एकता की एक नयी व्यवस्था एक आवाज बनकार देश को संयुक्त करने के लिए आगे बढ़ गया। ये शांति पुर्ण क्रांति ने जागे हुए भारतीय को फिर से सोने नही दिया। अंग्रेजो की बढ़ी हुई मानसिकता द्वीतीय विश्व युद्ध मे धरासायी हुई लेकिन अपने अकड़ के कारण भारत को तो आजाद किया पर इसके दो भाग मे बांट दिया जससे की उसकी प्रसांगिकता बनी रहे।

जागृत भारतीय को ये संदेश हमेशा याद रखने की जरुरत है कि विश्व के पटल पर हो रहे विकास की ओर अपना कदम बढ़ाते रहना बरना तुम्हे फिर से गुलामी के दिन देखने पर सकते है। इस आन्दोलन के जरीये लोगो को विते समय की गणना के साथ उससे हुए हानि की ओर ध्याणकर्षण के लिए और समाजिक जागरुकता बढ़ाने के लिए ही 08 अगस्त के दिन को खास बनाया गया है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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