विश्व जैव ईंधन दिवस

विश्व जैव ईंधन दिवस

जैव ईंधन आदि काल से ही मानव के उपयोग की वस्तू रही है। यह उर्जा का उत्तम और अक्षय श्रोत है। इसकी उपलब्धता कमोबेस हर जगह पर है। इसका उपयोग खाना बनाने, पहले ईँट पकाने, मिट्टी के बर्तन बनाने, घर ढ़कने के लिए खपरा बनाने तथा दैनिक उपयोग की वस्तू बनाने के लिए काम मे लाया जाता रहा है। आज भी लोगो को आसानी से ऊपलब्धता होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है।

बढ़ते शहरीकरण के कारण एक ही स्थान पर बहुत सारे लोग रहने लगे। बहुमंजीला ईमारतें बनने लगी तो इसके जगह पर गैस ने अपना स्थान ले लिया। इससे पहले कोयला का उपयोग किया जाता था। क्योकि ये जैव ईंघन से बना तो था तथा उच्च उर्चा देता था लेकिन इसके स्त्रोत सिमित है जिसके कारण इसके उपयोग को कम करने की कवायत होने लगी। इसके बाद डीजल और पेट्रोल ने अपना स्थान बना लिया। इससे उच्च उर्जा की जरुरत पुरी होने लगी। इसके भी बहुत सारे हानिकारक लक्षण दिखने लगे। अभी परमाणु उर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है।

बढ़ते उर्जा जरुरतों को पुरा करने के लिए कई तरह के प्रयोग किये जा रहे है। सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला तथा लम्बे समय तक चलने वाला प्राकृतिक के अनुकूल उर्जा की तलाश जारी है। इसमे सबसे उपयुक्त जैव ईँधन है। इसका उपयोग लम्बे समय तक किया जा सकता है। क्योकि जैव ईंधन का प्रमुख श्रोत बनस्पतियां है जो अपनी उर्जा सुर्या से प्राप्त करती है। उसको संचय करती है और ईसके उपयोग के बाद पुनः ये उर्जा वापस स्पेस मे चली जाती है। इसकी पुर्नाबृति होने की असीम संभवाना है। यह मानव के लिए उपयोगी भी है।

जैव ईँधन से उच्च उर्जा निकालने के लिए अभी शोध की और आवश्यकता है क्योकि इसके परंपरिक उपयोग के कारण ये पुरी तरह से जल नही पाते है फलतः इससे काफी मात्रा मे धुंआ निकलता है। इसको कम करने की जरुरत है जिससे की इससे उर्जा ज्यादा मात्रा में प्राप्त किया जा सके। विज्ञान की तरक्की मानव विकास के लिए सुख का साधन रहा है लेकिन उसके उत्तम उपयोग के लिए भी कार्य करने की जरुरत है। इसमे जैव ईंधन प्रमुख है। इसके उपयोग की उच्च गुणवत्ता वाला तंत्र बनाकर सहज और सुलभ किया जाय जिससे की आने वाले पीढ़ी को हम एक उन्नत पार्यावरण दे सके। उनके जीवन की उच्च आकांक्षा को पुरी करने मे हमारी सहज योगदान जैव ईंधन के उपयोग से और अच्छा क्या हो सकता है।

10 अगस्त का दिन इसी के विचार विमर्ष और चिंतन का रखा गया है। एक जन जागरुकता अभियान चलाने की जरुरत है जिससे की इसके तरफ मजबूत और उत्तम कदम उठाया जा सके। इससे किसान को जहां आमदनी होगी वही पर एक मजबूत आर्थिक व्यवस्था भी बनेगा जो लम्बे समय तक मानव को उत्साहित करता रहेगा।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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