
विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples)
आदिवासी दो शब्द से बना है पहला आदि जिसका अर्थ है पुराना और वासी का अर्थ है निवासी इसका मतलब हुआ किसी स्थान पर रहने वाला मूल या सबसे पुराना निवासी। भारत मे इन्हे अनसुचित जनजाति भी कहा जाता है। आदिवासी भारतिय उपमहाद्वीप का विषम जानजाति समूह है। यो लोग अपने विशिष्ट संस्कृति, प्रकृतिक के प्रति प्रेम और अनूठी जीवनशैली के लिए जाने जाते है। यो लोग जल, जंगल, जमीन को माता मानकर पूजते है। भारतिय संबिधान मे इन्हे विशेष सुरक्षा और सम्मान प्रप्त है। ये लोग अपनी अनूठी भाषा, नृत्य, संगीत तथा पर्व के लिए जाने जाते है। इसका समाज आपसी सहयोग और समाजिक मूल्यो पर आधारित कार्यक्रम को करते हुए स्वयं के विकास को आगे बढ़ाते है।
आदिवासी समाज का प्रकृतिक पर निर्भरता ज्यादा रहती है क्योक इसके निवास स्थान मे पाये जाने वाले बन संपदा तथा वहां की भूमि से खेती तथा पशुपालन के प्रति ज्यादा लगाव रहता है। विकास की प्रक्रिया को पहले ये लोग ज्याद तरजीह नही देते थे। लेकिन अब इनमे जागरुकता आई है और विकास की धारा से जुड़कर आगे बढ़ेने के प्रति प्रेरित हुए है। जागरुकता बढ़ने से शिक्षा का स्तर जहां उँचा हुआ है वही पर राजनितिक गतिविधि मे भी भाग लेने लगे है। ये लोग मेहनती प्रवृति के होते है। यहां की महिलायें भी पुरुष के कंधे से कंधे मिलाकर कार्य करती है।
महिलायें अपने छोटे बच्चों को पीठ पर कपड़े के सहारे वांधकर दोनो हाथ को स्वतंत्र रुप से उपयोग करते हुए कार्य को करते हुए स्वयं को क्रियाशील रखती है। आत्मनिर्भता के कारण इसको स्वयं मे सिमटकर रहना आता है। भारत सरकार ने इसके आर्थिक स्थिति को देखते हुए इनके जमीन जायदाद को विक्री पर रोक लगा दी है। इनके जमीन को खरीदने वाला आदिवासी ही हो सकते है जिससे की इसकी पहचान वनी रहे और इसके निवास के प्रकृतिक स्थान पर दुसरे की दखल ज्यादा ना हो जिससे की इसके स्तित्व पर ही सवाल ना उठ जाये।
विकास के विचार घारा को जिस तरह से ये लोग अपना रहे है उस तरह से वो दिन दुर नही जब इनके के दिन सुनहरे होगें और शिक्षा तथा कार्य मे बढ चढ़कर भाग लेगें। 9 अगस्त के दिन को आदिवासी के लिए खास तैर पे रखा गया है जिससे की इसके विकास कि ओर गहराई से ध्यान दिया जा सके। विश्व के लोगो की इस ओर विचार करने के लिए ही जागरुकता को बढाने के उदेश्य से इस कार्य को किया जा रहा है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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