
गोस्वामी तुलसीदास जयंती
रामचरितमानस, हनुमान चलीसा और विनय पत्रिका की रचना करने वाले जनमानस मे बहुत लोकप्रिय है। आमजन की भाषा मे रामायण का संस्करण के लोकप्रियता का कारण इसकी भाषा शैली है। चैपाई बद्ध होने से जहां पठन आसान होता है वही पर विश्लेषक को भी अपनी बात रखने का मौका मिलता है। संस्कृत की भाषा समय के साथ कठीन लगने लगी जिससे आम आदमी की पहुँच से दुर हो गई। तुलसीदास कृत रामायण को लोग घर मे रखने लगे। भगवान राम को अपना अराध्य बताने वाले हुनमान के भी परम भक्त भी है। भक्ति के सागर मे उनकी गहरी लगाव और उसपर रामायण के भाषा शैली ने उनको लोग प्रिये बना दिया।
हनुमान चलीसा की सार गर्भिता बहुत गहरी है। हिन्दी भाषा के चौपाई बद्ध गायन लोगो को बहुत भाता है। कही पर भय हो तो लोग हनुमान चलिसा का पाठ करते है। भक्ति की सागर मे लोगो के बिच रहकर जो तुलसीदास जी ने अनुभव किया उसका परिकलन यहां देखने को मिलता है। लेखक और भक्ति दोनो के समावेश ने उनके भाव को गंभीर बना दिया। कहा जाता है कि तुलसीदास जी को पत्नी से बहुत लगाव था। एक दिन तुसलीदास जी भारी बारिस के बाबजुद अपनी पत्न से मिलने चले गये इसपर पत्नी नाराज हुई और उनका भावना बहुत आहात हुआ जिसके कारण वो बैराग्य को धारण कर लिये और भक्ति के मार्ग को अपना लिया।
भक्ति के साथ-साथ समाज को करीव से उन्होने अनुभूति किया जिसका प्रभाव उनके किताब मे मिलता है। तुलसीदास जी के जयंती पर खास उनके जीवन और उनके त्याग के साथ उनका समाज के लिए किये गये अथक प्रयास के साथ उनके लोकप्रियता को भी समझना जरुरी है जिसमे उनके व्यक्तित्व के संधर्ष की एक रुपरेखा बनती है। किसी भी विषय को सिर्फ लिख देना काफी नही होता है बल्की समाज पर उसका प्रभाव होना भी जरुरी है। इस कला के धनी तुलसीदास जी का नाम आज भी लोग श्रधाभाव से लेते है। जीवन के किभी भी मोड़ पर यदि ज्ञान की त्रिनेत्र खुल जाये तो अपने सर्वोच्य मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवन उत्कर्ष के तरफ चल देना चाहिए,जिससे व्यक्ति की दिव्यता प्रकासित हो जाती है।
तुलसीदास कृत हनुमान चलीसा के चौपाई से सुर्य की दूरी का सटीक मिलन आज के बैज्ञानिक युग मे हो गया है। इससे अनुमान लगता है कि कितनी सटिकता के साथ उसने अपने लेखन कला को साधा था जिससे की आज भी उनकी भाषा कि प्रसंगिकता सही सावित होती है। यही उत्तम प्रयास उनको उन्नती के मार्ग पर ले जाता है। तुलसीदास जी के आज के जयंती पर हम सब ऐसे महान लेखक और भक्त को याद करते है जिन्होने युगो योगो तक आपनी बादशाहत कायम रखने कामयाव हुए है। हम उनको नमन करते है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
संबंधित लेख को जरुर पढेः
- अंबेदकर जयंती पर कुछ विशेष जानना होगा।
- महावीर जयंती हमे शांती के भाव जागाती है।
- गांधी जयंती हमे संधर्ष के गाथा सो समझाती है।