राष्ट्रीय कुत्ता दिवस (National Dog Day)
कुत्ता मानव का बहुत पुराना दोस्त है। ऐसा माना जाता है कि जब आदिमानव जंगली थे और शिकारी जीवन व्यतीत करते थे तब कुत्ता उनका सबसे बड़ा हथियार था। सुरक्षा, सावधानी तथा शिकार की सटीकता के साथ धेरने मे ये अच्छा मदद करता था। इनकी ये दोस्ती काफी पुरानी होते हुए भी भरोसेमंद है।
कुत्ता आजा भी पाला जाता है। आजकल कुत्ते की बहुत सारी नश्ल आ गयी है। शौकिया लोग कुत्ते को अपनी पसंद के हिसाव से पालते है। उसने अपनी व्यक्तिगत जीवन मे मन वहलाव का एक अच्छा साथी ढ़ुढ़ लिया है। व्यक्ति किसी विषय पर तर्क वितर्क करता है। इसके बाद वह अपनी प्रतिक्रिया देता है जिससे की मन मे एक सोच पैदा होती है और यह सोच मन को उलझा देता है। इस तरह से जीवन तो उलझता ही चला जाता है। जबकी व्यक्ति चाहता की वह अपनी भौतिक बैभव के सहारे आराम की जिन्दगी काटे। जहां पर कोई किंन्तू परंतू नही हो। कुत्ता इसमे सटीक बैठता है। वह खाता है और मालीक का आवभगत करता है। कभी कोई प्रश्न नही करता है। उसे सही गलत से कोई लेना-देना नही है। इसलिए कुत्ता को पालतू बनाने की प्रक्रिया शहरी जीवन मे तेजी से बढ़ रही है।
कुत्ता जो पालतू नही होते है उसका जीवन वहुत ही कठीन होता है। उसके खाने पीने के लिए कई प्रकार के जतन करने परते है। इसके बाबजूद उसकी जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहर मे तो हाल ऐसा है कि रात को कुत्ता का ही सम्राज्य चलता है। हर गली मुहल्ले मे रात होते ही कुत्ता अपनी कमान संभाल लेता है। शायद ही कोई अनजान उस गली से सलामत पुर्वक गुजर जाये। सरकार इसकी जनसंख्या कम करने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है जिससे की लोगो को परेशानी का समान नही करना परे।
कुछ कुत्ता ऐसे होते है जिन्हे सैनिक का दर्जा प्राप्त है। ये खोजी कुत्ते होते है। इसके सुंधने की शक्ति काफी अच्छी होने के कारण ये एक जैसे बस्तू की गंध को पहचान लेते है। जिसके सहारे अपराधी को पकडने मे आसानी होती है। इस तरह के पालतू कुत्ता सैनिक के लिए काफी मददगार सावित होते है।
कुत्ते की बात चली तो कुछ अमान्य घटना भी सुनने को मिलती है। जैसे कुत्ते को मांस खाने के रुप मे उपयोग करना जो की एक गलत व्यवस्था है। कुत्ते की भौकने के कारण परेशानी महसुस होने पर उनकी वेतरकीव रुप से पिटाई करना ये भी गलत है। कुत्ते यदी बीमार हो जाय तो बड़ा घातक हो जाता है। पागल कुत्ता तो भागत जाता है और राह मे आने बाले को अपना शिकार बना लेता है जिससे स्वास्थ्य की बड़ी समस्या बना जाती है। इसके इलाज के लिए पालतू कुत्ता को एंटीरेवीज का सूई दी जाती है। परंतु आवारा कुत्तो से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
गांव मे जहां लोग खेत का काम करके लौटते है और सबेरे सो जाते है क्योकि सुवह मे उनको काम पर जाना होता है। यहां कुत्ता पहरेदारी का कार्य करता है। किसान उसको खाने को देता है बदले मे वह रात भर निगरानी करता है। किसी भी अनहोनी के प्रति उसकी आवाज उसके मालिक को सावधान कर देता है। इससे धन का बचाव होता है।
आज का खास दिन कुत्ता के संरक्षण के लिए बनाया गया है। जहां पर भी कुत्ता दिखे व्यक्ति को सामुहिक रुप से उसके देखभाल करनी चाहिए। जहां तक संभव हो उसको खाना देना चाहिए क्योकि वो अपना खाने के लिए दुसरे पर ही निर्भर है। कुत्ता को अनावश्यक रुप से मारना गलत है। सभी पहलू के दो सिक्के होते है। इसलिए अच्छाई को देखते हुए इसके प्रती सहानुभूति ऱखनी चाहिए और संरक्षण के उपयुक्त उपाय करने चाहिए। नयी पीढ़ी का लगातार आगमन होता है और पुरानी पीढ़ी आगे निकल जाती है। इसके लिए ज्ञान की गंगा को लगातार बहना होता है। इसी बात को चरितार्थ करते हुए सबको कुत्ता दिवस पर नवीन पीढ़ी को इसके प्रति जागरुक करने की जरुरत है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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