
विश्व झील दिवस (World Lake Day)
चोरों तरफ से स्थल से घिरा हुआ पानी के एक स्थाई जल राशि को झील कहते है। झील मे पानी का स्थाई स्त्रोत वर्षा जल के इकट्ठा होने से इसके जल की एकरुपता बनी रहती है। कुछ झील मानवीय गतिविधी से दुर है तो उसकी एकरुपता बनी रहती है। लेकिन जो मानव पहुँच के करीव है उसके स्थिती लगातार बदल रही है। इस तरह के झील का उपयोग कई तरह से किया जाता है जिसमे प्रमुख है आवागमन तथा मछली उत्पादन। बढ़ते शहरीकरण के कारण व्यवसायिक गितविधी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है जिसके कारण यहां की जैव व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। इस जैव व्यवस्था को बनाये रखने के लिए एक युक्ती संगत प्रयास की जरुरत है जिससे की यहां के पानी प्रबावित ना हो और जैव विविधता को प्रभावित नही करे।
झील की उत्तम व्यवस्था के लिए पुनर्स्थापन विधी को लाने की जरुरत है जिससे की इसकी सुन्दरता बनी रहे। इसके संरक्षण से पीने के पानी की सुलभता बनी रहती है क्योकि आजलकल भूमिगत जल के अधिक प्रयोग के कारण जल स्तर लगातार निचे जा रहा है। झील के पानी इस स्तर को बनाने रखने मे मदद करते है। कर्षि कार्य को लिए जल की आसान उपलब्धता भी बनी रहती है। जलवायू परिवर्तन एक समस्या बनती जा रही है। ग्लोबल वार्मिग जैसे प्रकरण के कारण कई तरह की व्यवस्था मे परिवर्तन हो रहे है। झील से चलने वाली ठंढ़ी हवा आसपास के माहौल को बदलने मे मदद करती है।
टिकाउ और स्थायी प्रवंधन के लिए लगातार इसकी देखभाल जरुरी है। जलमार्ग के उपयोग पर्यटन के लिए किये जाते है। जिसके कारण कई तरह के समान इसमे फेकने से यहां की पानी प्रदुषित होती है। इसके लिए इसको लागातर साफ करने की जरुरत है जिससे यहां के जीव को ऑक्सीजन सही मात्रा मे मिल सके। व्यक्तिगत स्वर्थ मे लिप्त लोगो को स्वयं के आमदनी के अलावा और कुछ नही सुझता है। इसके लिए यह विशेष अभियान एक जागरुकता का काम करेगा जिसमे व्यक्ति की जागरुकता इसके संरक्षण मे अहम भूमिका निभायेगे। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वार 27 अगस्त के दिन को खास घोषित किया गया जिससे की लोगो मे जागरुकता फैले और संरक्षण के बात को गंभीरता से लें और विकास की रफ्तार कम होने नही पाये.
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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