जॉस्ट बिकॉज डे

जॉस्ट बिकॉज डे
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एक अच्छा और व्यवस्थित जीवन जीने के लिए व्यक्ति सतत प्रयासरत रहता है। वे अपने जीवन काल मे बहुत सारा अनुभव हासिल करता है। इसके प्रभाव से वो खुद के लिए एक खास नियम बना लेता है। इस नियम मे बो काफी खुशी महसुस करता है। यही नियम वो दुसरो को भी सिखाता है और ये समझाता है कि जीवन जीने का ये सबसे अच्छा मार्ग है। कई लोग तो स्वयं को एक नये उपदेशक के रुप मे भी व्यवस्थित कर लेते है। कोई भी विचार लम्बे समय के लिए स्थिर नही रहता है। इतिहास गवाह है की जीवन काफी जटील है। समय, परिस्थिती और आंतरिक हलचल लगातार बदलते रहते है। इसके लिए हमेशा तैयार हमेशा तैयार रहना चाहिए और नयी व्यवस्था के सोच बनानी चाहिए।

खुद के लिए कुछ नया सिखने, कुछ नया करने और कुछ नया समझने के लिए स्वयं के उपर एक सवाल लगाना चाहिए वो है क्यों। इस सबाल के जवाव से हमे इसके दुसरे पहलू को जानने का मौका मिलेगा। हम पहले से बेतहर तरीके से परिस्थिती को समझ सकते है। हमारी सोचने की दिशा बदल जायेगी। जो विचार पहले संकिर्ण था अब वो व्यापक हो जायेगा। इसकी व्यपकता हमे बहुत कुछ समझा देगी। जब हमारे सोचने की दिशा व्यापक होगा तो संयोग की समझ बेहतर होगी। वेहतर समझ से हम हालात की गणना और बेतहर तरीके से कर सकते है।

किसे भी कार्य को लिए जस्ट विकॉज का महतब है तुरंत क्योकी। जब भी हम कोई कार्य करते है तो सबाल उठता है क्यो। इसी का विस्तार रुप है क्योकि। क्योकि से हम जबाव देते है। जिससे की हमारे कार्य का मुल्यांकन हो जाता है। हमारे कार्य के मुल्यांकन से हमारा विचार को विस्तार मिलता है। यदि हम क्योकि का जबाब नही करते है तो विचार हमारे तक सिमित रहकर स्थिर हो जायेगी। हमको समझने वाला असमंजस मे आ जयेगा की हमारा अगला कदम क्या होगा। इस तरह के विचार हमको सामने वाला से दुर कर देगा।

समय के साथ हमको भी लगातार क्योकी का जबाव तैयार रखना है ताकि हम बेहतर समायोजन कर सके। अपने लिए एक बेहतर संयोग बनाने के लिए ये जरुरी है। अपने विचार को समझने तथा जांचने का एक तरीका है। हमे ये जानकारी मिलती है कि हम कितना वेहतर सोच सकते है। हम अपने लिए कितना वेतहर माहौल बना सकते है। इन सारी बातो को समझने तथा सिखने के लिए हमे किसी भी सोच से पहले तुरंत क्योकि लगाना चाहिए जिससे कि हमारे विचार की क्षमता उच्च हो और प्रभाव व्यापक हो।

इसी भाव को जान जागरण का अभियान बनाने के लिए 27 अगस्त के दिन को खास बनाया गया है। इस तरह के विचार को अंभ्यास का हिस्सा बनाते हुए कार्य को और धारदार बनाने की कला का सुत्रापात हो और जीवन मे व्यपकता का एहसास हो। कुछ नया करने का जजबा यही ये आयेगा। स्वयं के लिए कुछ नया करते हुए मन और शरीर दोनो को प्रफुल्लीत करने की कला को लिए तुरंत क्योकी को लगाने की क्रिया को जनजागरण का अभियान बनाने के लिए प्रेरित करता है।

लेखक एवं प्रेषक- अमर नाथ साहु

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By sneha

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