एक अनोखी मुलाकात

एक अनोखी मुलाकात

किसी व्यक्ति से मिलने की पुरी पटकथा हमारी मन मे चल रहे उसके प्रती विचार पर निर्भर करता है। हमारे विचार को बनने के लिए एक दुसरे के प्रति लगाव और सम्मान के साथ जरुरत की व्यवस्था पर निर्भर करता है। यदि व्यक्ति हमारे भाव के हो तो हमारे विचार लगातार सक्रिय रहते है और हमे प्रेरित करते रहते है। विचार के आदान प्रदान के बाद एक दुसरे प्रति नजरीया मे भी निखार आता है। एक संपुष्ट नजरीये के बाद आपसी लगाव को एक अर्थ मिलने लगती है और फिर एक अच्छी सोच के साथ आने वाले समय के लिए हमारी उत्सुकता बढ़ जाती है।

  यदि किसी बात का उलझाव हो और व्यवस्था मे मनमुटाव हो तो दुरीयां अच्छी लगती है। यदि मुलाकात की कोई मौका मिले तो वो अनोखी हो जाती है। क्योकी मुलाकात के बाद सिर्फ विचार नही बल्की व्यवहार और शरीर क्रिया विज्ञान की भाषा भी समझ आने लगती है। एक दुसरे के प्रति आपके लगाव का स्पष्ट प्रकटिकरण हो जाता है। यहां से एक संपुष्ट विचार आकार लेने लगती है जो अगले मुलाकात और व्यवस्था तक को संचालित करती है।

  व्यक्ति को अपने मुलाकात के लिए तैयार होने से पहले और बाद के लिए बनाये अपने नियम के सख्त नियम मे प्रति सजग रहना चाहिए। यदी नियम सरल और ग्राह योग्य है तो संभव है मुलाकात के बाद अपना नजरीया बदले और बदले नजरीये के अधिन आपके आने वाले समय का मुल्यांकन हो जाय। सिर्फ देखने के लिए बाह्य आकर्षण ही प्रयाप्त नही होता है वल्की आपको वर्तमान से क्रिया को आंतरिक व्यवहार के साथ समायोजित करते हुए एक ठोस रणनिति पर आगे बढ़ते रहना चाहिए जिससे की मुलाकात को गहराई मिलती रहे।

   कर्म योगी व्यक्ति अपने को एक सिमा मे बांधकर नही रखता है वल्कि वो समय के हिसाव से स्वयं को सभी तरह के परिसथिती के लिए तैयार रहता है और अपने कार्य के प्रति सतत लगनशील रहता है जिससे की सामने वाले को उसके बारे मे एक युक्ती संगत और सशक्त विचार बनाने मे मदद मिलती है। इस तरह के माहोल मे जो  बात होती है वह अनोखी हो जाती है।

 जो प्रगतिशील मिजजा के व्यक्ति होते है उसके लिए कोई बात बड़ी नही होती है क्योकि समय के साथ वो आगे निकल जाते है और अपने उपयोग को समझते हुए वर्तमान के साथ निर्णय ले लेते है जिससे उसके जीवन के मार्ग मे सरलता और तरलता बनी रहती है। उसके खुश होने के लिए महौल सतत नवीनता को प्राप्त होता रहता है जिससे उसके उसका तनाव कभी ठहरता नही है।    

ज्ञान मार्गी जीवन के लिए आपको एक टटस्थ व्यवस्था का हिस्सा बनना होगा जिससे की अपने काम के साथ अपके से सहयोग मे रहने वाले का भी कार्य हो या मर्गदर्शन होता रहे क्योकि कर्म से ही खुशी आती है और खुशी के मन तरंगित होता है और तरंगित मन मे उच्च विचार सम्पादित होते है।

   मुलाकात को प्रभावी बनान के लिए अपको पहले से तैयारी करनी चाहिए और एक दृष्टिकोण बनान के साथ अगले कदम के लिए इसको स्थिर कर देना चाहिए। अनोखी मुलाकात से तातपर्य है छोटे-मोटे बैचारिक तनाव को कम करना और नये उन्नत विचार के साथ आगे निकल जाना। कहते है दुनीया बड़ी है लेकिन इसके एहसास के लिए हमारे अवलोकन के दायरा को बढ़ाना होगा। हमारे सिमित दायरे मे हमे संकुचित विचार के साथ रहना होता है। जवकि एक बड़ा दायरा हमारे विचार को एक युक्ति संगत बनाते हुए हमे तरोताजा बनये रखता है।

 हम आशा करते है कि आपका हर मुलाकात एक अनोखी मुलकात सावित हो और आपके विकाश की गति सतत आगे बढ़ती रहे और आपके सुखद भविश्य मे निखार आता रहे।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः-

By sneha

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!