विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस
खाद्दान मानव की मुलभूत जरुर मे से एक है। जीवन प्रयंत इसकी आपुर्ती होती रहे इसके लिए इसकी सुरक्षा जरुरी है। खाद्दान के संरक्षण की जरुरत है क्योकि इसके नष्ट होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। बदलते पार्यावरण के कारण आजकल खाद्दान के उत्पादन बहुत प्रभावित हो रहा है। ग्लोबल वार्मिग के कारण जो तापमान मे परिवर्तन आया है इसके कारण बर्षा बहुत प्रभावित हुआ है जिससे की स्थानीय मौसम भी प्रभावित हुआ है। इस प्रभाव के कारण खाद्दान की उत्पादकता प्रभावित हुई है।
बढ़ती जनसंख्या भी खाद्दान कि कमी को दर्शाता है। विज्ञान के प्रगती के करण जन्म और मृत्यू दर प्रभावित हुआ है जिसके कारण जनसंख्या विस्फोट हुआ है। इसको रोकने के उपाय जरुरी है जिससे की खाद्दान की आपुर्ती सभी के लिए सुनिश्चत किया जा सके। उन्नत प्रद्योगकी के उपयोग से खाद्दान की उत्पादकता को बढाया जा रहा है जिससे की इसकी वैश्वीक आपुर्ती संभव हो सकी है।
खाद्दान का बितरण भी सभी जगह एक जैसा नही है। मानव को जरुरत की सभी खाद्दन अलग-अलग मैसम मे उत्पादित होते है और भौगोलिक स्थिती के विषमता के कारण भी सभी जगह इसकी उपलब्धता संभव नही होती है। इसलिए भी इसकी उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास जरुरी है। विज्ञान के विकाश ने जहां विकाश की अविरल धारा को बनाने मे काफी मददगार सावित हुआ है वही पर इसके दुषपरिणाम भी सामने आ रहे है। जिसके कारण खाद्दान का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
आपसी विद्वेष और बढ़ति आपसी प्रतिस्पर्धा भी एक बहुत बड़ी समस्या लेकर आया है जिसके कारण आपसी तनाव बढ़ रहा है जिससे की खाद्दान की उपलब्धता प्रभावित हुई है। आपसी समान्यजस्य को स्थापित करने के लिये किये जा रहे प्रयास को और बल देने की जरुरत है जिससे इसकी उपलब्धता को सुनिश्चित हो सके।
प्राकृतिक आपदा भी समय-समय पर बहुत प्रभावित करता है। इससे निपटने के आधुनिक प्रयास नाकाफी सावित हुए है लेकिन उन्नत तकनिक का लगातार साहायता लिया जा रहा है जिससे की खाद्दान की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। खाद सुरक्षा मे उत्पादित खाद्द पदार्थ को भंडारण की एक बहुत बडी समस्या है। इसपर भी ध्यान देने कि जरुरत है। जिससे की किसान को उसका उचित मुल्या प्राप्त हो सके।
ट्रान्सपोर्टेशन यानी की उत्पादित समान को एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुंचाने की कम लागत मे उपलब्धता सुनिश्चित हो जिससे की इसकी वितरण को सही समय पर सही जगह पर पहुंचाया जा सके। इस तरह के प्रयास को अभी और उन्नत बनाने की जरुरत है।
प्राकृतिक के अपयोग से अधिक खेती के लिए किसान लगातार वर्षा जल पर निर्भरता और घटती उर्वारा शक्ति भी खाद्दान को प्रभावित करती है। किट-पतंग भी इसके लिए जिम्मेदार माने जाते है। इसपर ध्यान देने की जरुरत है। खाद्दान के उपयोग करने वाले को भी इस बात का ध्यान देना है कि उसके अपने जरुरत के लिए ही समान का उपयोग करे जिससे की दुसरो को भी इसकी जुरुरत पुरी हो सके। इससे वस्तु के दाम भी नियंत्रित रहेगा और खाद्दान की उपलब्धता भी सही रहेगी।
इस तरह से हम कह सकते है कि आज खाद्दान की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरुरत है जिससे की विश्व का कल्याण हो सके। हर जरुरतमंद तक खाद्दान की उपलब्धता हो इसके लिए हर संभव प्रयास की जरुरत है जिससे सुख और समृद्धी का संदेश सभी जगह पहुँच सके। आज के दिवस जनमानस के लिए बहुत ही उपयोगी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी जिससे की .यह एक आंदोलन बन जाय और एक सुखद खाद्दान के भविश्य को स्थापित किया जा सके और अमीरी गरीबी के बीच भुखमरी को जड़ से सदा के लिए समाप्त किया जा सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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