विश्व जनसंख्या दिवस
संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार विश्व की वर्तमान जनसंख्या नवम्बर 2022 में 8.3 अरब को पार कर गया था, तब से इसमे लगातार बृद्धी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार भारत की 2026 में जनसंख्या लगभग 147 करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की कुल आबादी दुनिया की कुल आबादी का 17.7% है। भारत मे जनसंख्या घनत्व 407 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। भारत मे 67% जनसंख्या 15 से 64 वर्ष के बीच है।
भारत की जनसंख्या में लगातार बृद्धी हो रही है। इसके कई कारण मौजुद है जिसमे प्रमुख है मृत्यू दर मे आई कमी है। लोगों मे बच्चो के पालने पोषने के पिछे जो आर्थिक कारण थे वे आजकल कमजोर पर रहे है पर अभी भी लोग पुर्णतः इससे मुक्त नही हुए है। लोगों के रहन-सहन में बदलाव हुआ है पर पहले से ज्यादा सुविधा मिलने के बावजूद लोगो की समझ में उत्तरोत्तर बृद्धी नहीं हुई है।
जनसंख्या बृद्धी के साथ लोगों की समस्यायें भी बढ़ने लगी है। उस जरुरत के हिसाव से घरती पर धन्य धान्य की कमी भी होने लगी है क्योकि धरती पर उपज तथा रहन सहन के स्थान सिमित है जिससे की खादान्न की कमी का सामना करना परता है। इस तरह से भौतिक जीवन की सारी आवश्यकतओ को पुरा करना संभव नही होता। हवा पानी तक की समस्या होने लगती है। प्राकृति जीवन को जिस दर से बनाती है उस दर से उसका बिनाश भी करती है और इससे प्रकृति में संतुलन बना रहता है, लेकिन मानव ने अपने लिए एक क्रित्रिम संरचना बना लिया है जो मानव की सुरक्षा प्रदान कर रहा है जिसके कारण प्रकृति का प्रभाव दुसरे तरह से पर रहा है।
मानव समाज पर परने वाले प्रभाव को देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण की बातें विश्व स्तर पर चल रही है। जो वर्तमान मनाव है वही सुखी और सपन्न साधन के साथ जीवन यापन करते हुए अपने मुल घाम की ओर विदा हो और जो आने वाले है वे एक समय के बाद आयें और अपनी जीवन यापन करे। इसके लिए लोगो मे जगरुकता बनाने की जरुरत है जिससे की एक स्वस्थ्य परंपरा को निभाया जा सके। आजकल बदलते समाजिक परिवेश ने लोगो को एकाकी जीवन जीने की कला का सुत्रपात कर दिया है जिसके कारण लोग अब बच्चा पैदा करने के लिए कम उत्सुक दिखाई पर रहे है लेकिन इसका प्रभाव शिक्षित वर्ग तक ही सिमित है। आज भी अशिक्षित लोग अपनी जनसंख्या के प्रति पहले की ही समझ रखते है।
आज के खास दिन पर लोगों मे जागरुकता फैलाने का दिन रखा गया है जिससे कि लोग सतर्क रहे और वैश्विक स्तर पर जनसंख्या विस्फोट से निपटा जा सके। हम आशा करते है कि लोग इस विधा को अपनायेगे और एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण करेगे।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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