अंतर्राष्ट्रीय आशा दिवस

International Day of Hope

जीवन एक सतत क्रियाशील इकाई है। इसमे पाये जाने वाला हमारा मन सतत ही नई उड़ान पर रहता है। इसी के उड़ान से मानव को नई उम्मीद जगती है। इसी उम्मीद को चरीतार्थ करने के लिए व्यक्ति प्रायस करता है। उसका यही प्रयास भौतिक जीवन की खोज से आशा की किरण को जन्म देता है। आशा की किरण व्यक्ति की अपनी संपत्ती है क्योकी सकारात्मक सोच उसे आशा की ओर धकेलती है जवकी नकारात्मक सोच उसको निराशा की ओर प्रेरित करती है। इस दोनो के बीच फंसा मानव विवेक का सहारा लेता है। उसका विवेक ही उसे जागृत करता है और उसके मन को ताकत देता है। उसके ताकत उसको विकाश की ओर अग्रसर करता है। उसको लगातार प्रेरित करते रहता है और एक लक्ष्य को पा लेता है यही आशा की किरण उसके अंदर असमित साहस को जन्म देता है।

 विकाश की दिशा मे आगे बढ़ने के लिए आशा का होना जरुरी है क्योकी खोज की प्रक्रिया यहीं से शुरु होती है। खोज आशा के अनुरुप ही चलती है जबकी आशा मन के तरंगित उत्सव का हिस्सा होता है जिसको समझना कठीन है पर यह व्यक्ति की साधना को दर्शाता है। विकाश की सकारात्मकता व्यक्ति को सबलता प्रदान करता है। वह हर कदम पर लौजिक लगाता है और स्वयं को आस्वस्त करता है। उसके कार्य करने की क्षमता ही उसके विश्वास को शक्ति देती है। कार्य के दौराण होने वाली बाधा  और उससे बाहर निकलने की उसकी मानसीक तैयारी और सफलता उसके मार्ग को और आसान बना देती है।

12 जुलाई का दिन इसी विधा को साधने का दिन है। जीवन के भाग दैर से कुछ पल निकालकर स्वयं को एक लक्ष्य के प्रति नियोजित करने की कला का सुत्रपात करने की प्रेरणा का ये अनुठा दिन है। कहते है कब शुरु करें तो कहा जायेगा की अब शुरु करो। थोड़ी-थोड़ी चला करो विचार तो सतत प्रक्रिया है सुधार होते रहेगा। आशा की इस विश्वास को पंख देने की ताकत तो बनानी ही होगी। आज के इस दिन से सबको प्रेरणा मिले और सब आगे बढ़े यही हमारा विश्वास है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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