
विश्व युवा कौशल दिवस (World Youth Skills Day)
विकाश के नजरीये से युवा अवस्था को मानव विकास के लिए सबसे सक्रिय अवस्था मे गीना जाता है। इसमे आगे बढ़ने की अशीम संभावनायें होती है। इन संभावनाओं मे से सबसे उपयुक्त को चुनना होता है। यही चुनाव जीवन को उपयोगी और अर्थपुर्ण बनाती है। चुनाव करते समय विभिन्न पहलुओं का आंकलन करना होता है और श्रेष्ठतम का चुनाव करते हुए अपने लक्ष्य को बनाना होता है। एक बार जब लक्ष्य का चुनाव हो जाय तो बार-बार लक्ष्य को बदलने से रास्ते में भटकाव हो जाता है। यह भटकाव आसान नही होता है। यह दशा और दिशा दोनें बदल देती है फिर खुद को संभालना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है।
लक्ष्य को साधते समय इसके सारे आयामों को करीब से समझते हुए कार्य करने होते है। जरुरत के हिसाब से कार्य को सिखना भी परता है। क्योकि कार्य को कौशल के साथ करने से ही प्रतिस्पर्धा मे टिके रह सकते है नहीं तो कार्य अवरोध के साथ आने वाली समस्या से जुझना मुश्किल हो जाता है। गीता मे कहा गया है कर्म कौशलम यानी की कर्म को कौशल के साथ करने से व्यक्ति की सफलता सुनिश्चित होती है। एक कर्म अपने कौशल के साथ सारी आयामों के मानडंड को पुरा कर लेता है फिर दुसरा कोई नही उसका तोर निकाल सकता है।
आजकल के बहुआयामी जीवन मे विकास कि जो धारा चल रही है उसमे भटकाव बहुत है। भटकाव से बचने के लिए कार्य को बारीकी से अवलोकन के साथ खुद के सामर्थ और व्यवस्था को भी देखना होता है। बाजार के बदलाव के साथ स्वयं को जुझारुपन की स्थिती को भी भांफना होता है। एक अनुमानतम वाला कार्य बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है। इसके लिए योजना को सही और पुरी ततपरता के साथ करने की जरुरत होती है। सुनी-सुनाई बात को लेकरके आगे बढ़ने से कार्य अवरोध हो सकता है। क्योकि लोग अपने हिसाव से विचार को तोड़-मड़ोर देते है जिसके कारण विचार की मुल स्वभाव बदल जाती है और व्यक्ति दर व्यक्ति अनुभव बदलते भी रहता है जिसके कारण उसकी प्रमाणिता को सही नही कहा जा सकता है।
एक पुर्ण प्रशिक्षित व्यक्ति अपने कार्य को अच्छी तरह से कर सकता है। कार्य को करते हुए अपने अनुभव से नये आयाम को जोड़ भी सकता है। उसमे अपेक्षित बदलाव भी कर सकता है। बाजार और मांग के हिसाब से अपने को ढ़ाल भी सकता है। विकाश की प्रक्रिया सतत चलती रहती है। युवा के कार्य की क्षमता, चिंतन, और कर्मठता उसके विकाश को तेजी से आगे ले जाती है। आजकल युवा को विकास के मुल घारा से जोड़ने के लिए कई तरह के योजना को बनाया जा रहा है जिससे कि उसके आंतरिक शक्ति मे निखार आये और वो एक वेहतर विकल्प के साथ खुद को आगे ले जा सके।
युवा का शुरुआती दिन बड़ा ही संधर्षशील होता है। उसके संधर्ष मे धैर्य के साथ विवेकी होना जरुरी होता है। जिससे की उसके विकाश को स्थायित्व प्रदान की जा सके। जिसका विजन क्लिर है वो अपनो को साध लेते है और विकाश की यात्रा पर आगे चलते हुए एक सफल व्यक्ति के रुप मे खुद को स्थापित भी कर लेते है। जो मन की बृति को नही समझ पाते है उसका सपना विखर जाता है। शरीर के क्रियावल हमेशा भटकाव के लिए प्रेरित करतें है लेकिन साधित व्यक्ति को अपने लक्ष्य पर ही आगे चलना होता है। जिससे की उसके विकास की यात्रा सुखद और आसान हो।
बहुत मेहनत और थोड़ी आय से व्यक्ति आंतरिक रुप से परेशान हो होता है। यदि उसका नजरीया समय के साथ आगे बढ़ने की है तो वह रुकता नही है बल्की समय के साथ सिखते हुए खुद को आगे ले जाता है। युवा के इसी गुणकारी भाव को समझते हुए 15 जुलाई के दिन को खास बनाया गया है। जन जागरण करते हुए लोगो को अपने कौशल मे निखार लाने के लिए प्रेरित करने का ये उत्तम समय है। शुरुआत के लिए इंतजार नही वल्कि कार्य प्रेरणा के साथ आगे चलने की है। कहा जाता है कि कार्य खुद सिखाता है और व्यक्ति आगे निकलते चला जाता है।
हर युवा अपने जीवन को उर्जावान बनाये और अपने कौशल विकाश के साथ आगे बढ़ते रहे जिससे की संभावनाओं के द्वार खुलते जाय और वो आगे निकलते जाय। हमरा विश्वास है कि मार्गदर्शन के इस विचार को लोग स्वीकार करेगें और अपने विकाश के लिए उचीत मार्ग का चुनाव करेंगे।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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