राष्ट्रीय चचेरे भाई-बहन दिवस

राष्ट्रीय चचेरे भाई-बहन दिवस

रिस्ते की बंधती डोर को समझने के लिए आपसी भेद-भाव लेनी-देनी तथा समझ-बुझ का असर होता है। इस असर को कम करने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए इस खास दिन का आयोजन किया गया है। जीवन मे होने वाली आपसी तनाव का बड़ा ही तान-बाना होता जिसमे व्यक्ति बंधकर कुछ करने के लिए मानसिक रुप से तैयार नही हो पाता है। जबकी आपसी भेदभाव को कोई बड़ा कारण नही होता है।

एक दुसरे को सम्मान करने तथा एक दुसरे के प्रति निष्ठावान रहने के कला की कमी के कराण ये प्रभाव देखने  को मिलता है। जिससे विकास की धारा प्रभावित होती है। व्यक्ति स्वयं के लिए व्यक्तिगत सोच से बाहर नही निकल पाता है। इसी सोच से बाहर निकलकर कार्य करने की कला को सराहा जाता है। ये दिवस ही खास तौर पर आपसी रिस्ते को मजबुती प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है।

रिस्ते की बागडोर को सम्भालने के लिए यदि दोनो तरफ से प्रयास हो तो रिस्ते को मजबुत और स्थायित्व प्रदान की जा सकती है। इस भाव को प्रेरित करने के लिए आज का दिन खास है जो एक जागृत प्रेरणा को जगाता है और कार्य के लिए प्रेरित करता है जिससे की एक मिशाल कायम की जा सके। इस अनुवंध के साथ कार्य करते हुए जीवनोउपोयगी बाते के सार्थक तत्व को समावेस करते हुए आगे बढ़ते रहने की जरुरत है जिससे की स्वयं को एक मजबुत आधार के साथ खड़ा होने की विचार को चरितार्थ किया जा सके।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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  • सादगी रिस्ते को मजबुती प्रदान करती है।

By sneha

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