अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (International Day of Older Persons)

जीवन के तीन अवस्था मे से सबसे अंतिम अवस्था बृद्धा अवस्था ही है। बृद्ध हो जाने के बाद शरीर के अधिकांश सक्रिय अंग अपनी कार्य को शिथिल कर देते है। जिसके कारण सामान्य कार्य को भी करना कठीन हो जाता है। इसके लिए किसी सहारे कि जरुरत होती है। परिवारिक व्यवस्था एक ऐसी विधा है जहां पर बुजुर्ग को सेवा मिलती है। जीवन भर जिस बच्चो को पाला पोषा उसी बच्चे पर आशा होती है की उसकी अंतिम अवस्था मे देखभाल करेगा।

पहले की जीवन खेती बारी पर टीका हुआ था जहां पर संयुक्त परिवार रहता था। आय का स्त्रोत सिमित था और एक व्यक्ति मालिक होता था। जिसके कारण एक उतकृष्ट व्यवस्था बनी हुई थी। प्रयाप्त मात्रा मे घर होते थे। पुरी जीवन प्रक्रिया एक उच्च व्यवस्था के सहारे चलती थी। आजकल एकल परिवार होता है। जहां पर घर सिमित मात्रा मे होते है। आमदनी भी अधिकांश लोगो की औसत ही है। एकल परिवार होने से कार्य का पुरा भार परिवार के सदस्य पर ही होता है। जिसके कारण बुजुर्ग को दिक्कत का सामना करना परता है।

ग्रामिण जीवन मे लोग एक दुसरे से चौपाल पर मिलते थे जहां पर जीवन के हर तरह की बातें होती थी। जिसके कारण मनोभाव सही बना रहता था। आजकल लोग या तो मोबाईल मे लगे रहते है या देर तक काम करके लौटते है। लोगो के पास समय ही नही है कि एक दुसरे के साथ बातचीत करे। इसके कारण व्यक्ति एकाकी जीवन जीने लगा है। सबसे ज्याद समस्या बुजुर्ग को होने लगी है क्योकी उसका दिनभर का समय कटता ही नही रहता है। एक ही जगह पर सारा समय बिताना कठीन लगने लगता है। मिलने जुलने वालो का भी कोई व्यवस्था नही रहता है।

आजकल बुजुर्ग के लिए एक अलग से व्यवस्था बनने लगी है जहां पर सारे बुजुर्ग एक साथ रहते है और अपने परिवार जैसा महसुस करते है लेकिन जो अपनी सम्पत्ती उसने जमा की जिसके लिए उसने अपने जीवन के बहुमूल्य समय बिताये उसी से जुदा होना बहुत खलता है। उसको लगता है की उसका जीवन अधुर रह गया है। इसी व्यवस्था को देखते हुए लोगो से लगातार अपिल किया जा रहा है कि अपने घर की बुजुर्ग की सेवा करे। जिससे की उसका अंतिम समय सही से बीते और उनकी एकाकीपन दुर हो जाए।

1 अक्टूबर का खास दिन इसी बिषय के ध्यान मे रखकर बनाया गया है। जिससे की बुजुर्ग की सेवा के लिए ततपरता दिखावे और समाज के बीच एक सकारात्मक विचार का प्रतिस्थापन हो सके। वो दिन दुर नही जब सामाजिक जागरुकता हो और लोग सेवा के लिए ततपर ना हो। आब तो न्यायालय भी बुजुर्ग के प्रिती निष्ठानवान नजर आ रहा है। बुजुर्ग के देखभाल के लिए उसके संपत्ती मे उसके अधिकार को व्यवस्थित रखा गया है। जिसके कारण सेवा का भाव जागृत हो और कार्य कुशलता के साथ हो सके। इसी विषय को जागरुकता का दिन बनाते हुए लोगो के बीच खास बनया गया है। बुजुर्ग की सेवा करे और खुद के लिए एक बेतहतर कल का निर्माण करे।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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