
अंतर्राष्ट्रीय ओवरडोज जगरुकता दिवस (International Overdose Awareness Day
किसी भी वस्तु को जरुरत के हिसाव से ही प्रयोग किया जाता है। इससे अधिक या कम दोनो ही फायदेमंद नही होता है। इसके लिए कार्य की पुरी प्रक्रिया जाननी होती है। प्रक्रिया को जानने के बाद उसकी भरपाई की जा सकती है। भौतिक जीवन के कार्य की भरपाई करना आसान होता है क्योकि इसके उपयोग से इसको पनः प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन जीवन के साथ ऐसा करना बड़ा नुकसानदेह होता है। जाने अनजाने मे किया गया कार्य के परिणाम को जनने के बाद सावधानी एक जरुरी कदम हो जाता है।
गलत कार्य को लोग जल्दी सिख जाते है क्योकि गलत कार्य का संबंध उसके आंतरिक प्रक्रिया से होता है जिसमे उर्जा का कम उपयोग होता है और दिमाग इस कार्य को आसानी से कर लेता है। वही पर सही कार्य को सिखने के लिए दिमाग को अधिक उर्जा लगानी परती है फलतः दिमाग वहां से हट जाता है। सही गलत का फैसला व्यक्ति खुद करता है। समाज के अंदर हर तरह के लोग होते है। इस प्रकार समाज को एक पुरी व्यवस्था के साथ चलना होता है। वही से सही गलत की प्रक्रिया समझ मे आने लगती है।
नशा करने की प्रक्रिया इसमे सबसे उपर आती है। नशा को शुरुआत मे थोड़ा लेने से ही बहुत बड़ा परिवर्तन दिखाई देता है। क्योकि शरीर के लिए ये अनजान होता है। धिर-धिरे इसकी मात्रा बढ़ती जाती है। एक समय ऐसा आता है जब शरीर इसकी मात्रा को अपने क्षमता से बाहर समझने लगता है। लेकिन नशा के आदी लोगो को एक खास तरह के प्रभाव को लाने के लिए लगातार प्रयास मे इस तरह के हालात बन जाते है। इसका कारण उनको भारी नुकसान उठाना परता है। इसके लिए लोगो को जागरुक करने की जरुरत है। जिससे की समय के रहते उसको बचाया जा सके।
नशा के आलावा भी दवा को लेते समय भी इस बात का ध्यान रखना जरुरी है कि दवा की सही डोज की ही समय से ले जिससे की इसकी हानी ना हो। हर दवा की डोज उम्र और बजन के हिसाव से तय किये जाते है। साथ ही संवेदनशीलता का भी ख्याल ऱखना होता है। इस बात की पुरी जानकारी को ध्यान मे रखते हुए ही पुरी तरह से कार्य को करने की जरुरत होती है। जीवन के हर क्षेत्र मे सही मानडंड को अपनाने से हानी कम होती है। इसके लिए एक मानडंड को स्थापित करना होता है। इसको करने के लिए प्रशिक्षण की जरुरत होती है।
31 अगस्त के खास दिन को इसी बात को ध्यान मे रखने के लिए नियोजित किया गया है कि लोग ओवरडोज का ख्याल रखे जिससे की उसको परेशानी का सामना नही करना परे। इसके लिए एक दुसरे को जागरुक करन की जरुरत है। कार्य तो सतत चलते रहता है। सावधानी सबसे बड़ी जरुरत है इसके लिए ध्याण देने की जरुरत है जिससे की कार्य मे सुगमता हो।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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