Uncategorized

वनस्पति और पार्यावरण

बनस्पति और पार्यवरण वैस्वविक प्रतिस्पर्धा के बढने के साथ ही विकाश की होर सी लग गई है। विकाश की इस दिशा का निर्धारण आर्थिक स्तर पर किया जाना लेगा है। आर्थक लाभ-हनि के कारण बहुत सारे बातों के नजरअंदाज कर दिया जा रहा है। इस नजर अंदाज का प्रभाव दिखने भी लगा है। इस प्रभाव को आंकलन करने वाले तथ्य को ज्यादा महत्व नही दिया जा रहा है क्योकि इससे नुकसान का भाव आता है।       सबसे ज्याद प्रभाव जिसपर पड़ा है वह है हमारा वनस्पति लगातार इसकी संख्या घटती जा रही है। जितने पेड़ लगाये जा रहे है उससे…
Read More

Bali aur Sugriv

सुग्रीव बाली गृह स्थल रामायण कालीन समय की गाथा हमारे जनमानस मे बड़ा ही गहरा स्थान पा चुका है। हमारे रहन-सहन से लेकर हमारी पुजा-पाठ तक की बिचारधारा को इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। इसके वास्तविक होने के प्रमाण दिये जाते रहे है। यदि ऐसा सुनहरा जगह मिल जाय जिससे की इस कथानक के किरदार के बारे मे जानकारी हो तो मन मे उतावलापन तो देखने को मिलता ही है। ऐसे ही एक वाक्या बाली-सुग्रीव के बारे मे कही जाती है। बाली-सुग्रीव के रामायण कालीन समय के गृह स्थल को देखने का मौका मिला। पता चला की…
Read More

जोगीरा9

होली के जोगीरा को दर्शाता यह काव्य लेख अनोखा है। होली के जोगीरा2 होली के जोगीरा3 होली के जोगीरा4 होली के जोगीरा5 होली के जोगीरा6 होली के जोगीरा7 होली के जोगीरा8 होली के जोगीरा9
Read More
error: Content is protected !!