
शहीद दिवस
शौर्य और विरता की कहानी सुनकर मन उत्वेलित और उत्साहित हो जाता है। मन मे उत्पन्न होने वाला उदगार हमारे जीवन को अर्थपुर्ण बनाने के लिए हमें प्रेरित करता है। यह प्रेरणा हमे जीवन के उच्चता के भाव को सहजता से स्वीकारने के लिए हमे सहज बनाता है। यह सहजता ही हमें जीवन को परिभाषित करने मे हमारी मदद करता है। हमारा आत्मबल हमारी ताकत बनकर हमे आगे बढ़ने के लिए हमारा मार्गदर्शन करता है। सकारात्मक विचार की ओर बढ़ता हमारा कदम हमें मजबुत बनाता है। यही मजबुती राष्ट निर्माण मे अग्रणी भुमिका निभाता है।
शहीद दिवस को मनाते हुए हम उस वीर पुरुष को याद करते है जिसने कठीन परिस्थती मे अदम्य साहस का परिचय देते हुए जो उपलब्धी हासील की वह सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नही थी। उनके इस साहसी कदम से कुछ नया करने का जजबा हमारे अंदर भी उद्वेलित होता है जो एक मजबुत राष्ट्र के लिए जरुरी है। सुरक्षा की प्राथमिकता ही हमारे उदेश्य को सफल बनाती है। यह वह विचार है जो हमे सतत प्रयत्नशील रहने के लिए नियोजित करती है। यह हमे सिखाती है की अर्थपुर्ण जीवन ही हमें गौरवांन्वित करती है जिससे हम अपने उंचे मानडंड को पुरा कर पाते है और हमारा जीवन दिर्ध बन जाता है।
इस नाशवान जीवन को समझना कठीन हो जाता है जब हम निम्न स्तर के सोच से स्वयं को संचालित करते है क्योकि हर कदम पर हमें चुनौती मिलती है जिसका सामना हमें करना होता है। यदि हम सामर्थवान नही भी है तो हमे अपने जीवन के मुल भाव को समझते हुए स्वयं के लिए एक विक्ल्प चुनना होता है जो हमारे जीवन के अर्थपुर्ण और प्रेरक बना देता है। यही भाव हमारे स्वाभीमान की भी रक्षा करता है। ऐसे ही महान नायक की गाथा से शहीद दिवस भरा हुआ है। परिस्थितीयां अलग-अलग हो सकती है पर हमारा राष्ट्र प्रेम हमे अमरता दिलाता है।
राष्ट्र को सुरक्षित देखने के लिए महाभारत मे भिष्मपिताह ने खुद को बान की शैया पर जाने के लिए भी तैयार हो गये। उन्होने ये सावित किया की राष्ट्र से बढ़कर कोई भी चाहत बड़ी नही होती है क्योकि राष्ट्र है तभी हम सुखद अनुभुति कर सकते है वरना हमारा कुठिंत मन एक निराश जीवन को जीकर भी हतोत्साहित रहेगा। राष्ट्र की सबलता और उन्नति शहीद को इस शरीर छोड़ने के बाद भी उत्साहित करता है कि उन्होने एक मिशाल काइम किया और आने वाले पीढ़ी को एक प्रेरणा दी जिससे उसका समाज एक उन्नत जीवन को पाप्त करता हुए एक अनोखा इतिहास लिखेगा।
राजगुरु सुखदेव और भगत सिंह की साहसीक कहानी निर्भिकता के साथ गलत को बिरोध करने के लिए प्रेरित करता है। कहा जाता है की विरोध तो कही से होनी चाहिए तो इसके लिए स्वयं को चुनना चाहिए जिससे की एक चिराग जले और कारवां लगता जाय। आज का आजाद भारत उन हुतात्माओं को याद करता हुए उन्हें नमन करता है जिन्होने राष्ट्र मे नवचेतना जागृति के लिए स्वयं को आगे किया। हे वलिदानी पुरुप तु आज हमारे प्रेरणा बनकर हमे राष्ट्र पर आने वाले चनौती से लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है इसके लिए नमन। यही साहस हमारी राष्ट्र की पुंजी है जो हमे आगे बढ़ा रहा है।
जय हिन्द जय भारत
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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