
राष्ट्रीय रम दिवस (National Rum Day)
17 वीं शताब्दी में कैरिबिआई गन्नों के बगानों मे इसकी खोज की गई थी। इसका प्रयोग नोसेना और नाविको के बीच ऐतिहासिक रुप से महत्व दिया जाता था। गन्ने के रस से बनने वाले इस प्राचीन शराब की इतिहास, संस्कृति और बनने वाले समान का आनन्द लेने के लिए इस दिन को खास बनाया गया है।
शराब पीना को बुरा माना जाता है। इसको पीने से लगातार मना किया जाता है। जबकि आज भी लोगों के द्वारा इसको पीया जाता है। इसको पीने के बाद कुछ समय के लिए दिमाग से तनाव हट जाता है और दिमाग को हल्का और उत्साहवर्धक करता है जिससे मन स्वतंत्रत गति से विचरण करने लगता है और नये-नये भाव स्वतः स्फर्त गति से आते जाते रहते है जिससे खुश दिल महसुस होने लगने लगता है। इसी ततकालिक सुख को पाने के लिए लोग शराब को पीते है। वैसे तो पीने की बात बहुत पुरानी है। कहा जाता है कि हरप्पा संस्कृति के लोग भी सोमरस पीते थे। ये एक तरह का पेय पदार्थ था जो कुछ समय के लिए मन को उत्साहित कर देता था। ये मुख्यरुप से व्यवसायिक वर्ग के लोगों मे प्रचलित था।
शराब की एक बार लत लग जाती है तो वो छुटती नही है। क्योकि इसी लत लगने से दिमाग मे कुछ हार्मोनल बदलाव हो जाता है जिसके कारण व्यक्ति असहज हो जाता है। इसको रोकने के लिए शराब को मना किया जाता है। वही दुसरी जगह लोग पीकर बदमाशी भी करते है। उसके सोचने और समझने की शक्ति का हास हो जाता है। शराब का असर तेजी से होता है। लेकिन इसके साथ खाने वाले कुछ बस्तु ली जाती है जिससे की इसका असर देरी से हो। पीने वाले की लगातार आदत से उसकी पीने की क्षमता बढ़ती जाती है और उसका नियंत्रण भी खुद पर से हटने लगता है। धिरे-धिरे उसकी ये मजबुरी बन जाती है। इसके बाद इसका असर लीवर और शरीर पर भी परता है। जरुरत से ज्यादा पीना आर्थिक रुप से भी नुकसानदेश होता है इसलिए इसको पीने से मना किया जाता है।
शराब को सेना को पीने की छुट है वहां पर एक सिमित मात्रा मे इसका उपयोग किया जाता है जो दिमाग को हल्का कर देता है। कुछ पल के लिए तनाव रहीत करता है जो एक उत्साह वर्धक का कार्य करता है जो उसके निर्णय लेने में मदद करता है। इसके मात्रा को यदि नियंत्रित नही किया जाय तो ये काफी नुकशानदेश माना जाता है। इसकी हल्की मात्रा दवा मे भी डाली जाती है जिससे की ये बीमारी को ठीक करता है। वर्तमान समय मे इसको बंद करने तथा इसके पीने के लिए छुट देने मे समय-समय पर बदलाव होते रहते है। कुछ नियम भी निकाला गया है कि शराब पीकर गाड़ी नही चलाना है। इससे दुर्घटना की समस्या बढ़ जाती है।
शराब को एक नियंत्रित तरीके से ले और संयम के साथ व्यवहार करे तो इसके दुरउपयोग को रोका जा सकता है। यदि हानीकारक होता असर दिखाई परता है तो नशा मुक्ती केन्द्र का सहारा ले सकते है। यदि जुरुरत हो तो इसको सदा के लिए छोड़ भी सकते है। अपनी इच्छा पर स्वयं ही नियंत्रण करना परता है क्योकि हमारी व्यवहार ही हमे एक योग्य व्यक्ति बनाता है जिसको की नियत्रित करना जरुरी होता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साह
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