राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस

राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस
राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस
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लघु उद्योग का सकल घरेलू उत्पाद मे बड़ा योगदान होता है। जो निर्यात को भी बढावा देता है। इन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। किसी भी देश के विकास को बढ़ावा देने के लिए लोगो को अत्मनिर्भर होना जरुरी है। यह तभी होगा जब हर व्यक्ति कुछ न कुछ लगातार करता रहे। जिससे की अपनी आवश्यका तो पुरी होगी ही साथ दुसरो को भी लाभ पहुंचाया जा सकेगा। इस प्रकार की व्यवस्था से देश के प्रत्येक व्यक्ति एक स्वयं व्यवस्था समुह से जुड़ जायेगा जो एक मजबुत तंत्र का हिस्स बना जायेगा। इस कार्य को करने के लिए लगातार प्रोत्साहन की जरुरत होती है। धन को चलायमान बनाने के लिए सतत कुछ नया करने का जजबा ही व्यक्ति को आगे ले जाता है। उसको स्वयं के द्वारा किया गया कार्य संतुष्टी देता है।

कार्य तो सभी करते है लेकिन एक कार्य को खास व्यवस्था के साथ जोड़कर कुछ लाभकारी प्रयास के लिए किये जाय तो वो धीरे-धीरे उद्योग का रुप ले लेता है। व्यवस्था और समझ का अपना ही एक तोड़ होता है। जैसे – जैसे समझ बढ़ती है व्यवस्था भी बदलते जाता है। बदलते व्यवस्था के साथ नये नये उपाक्रम जुड़ते जाते है और कार्य को आसान बनाने मे कोई परेशानी भी नही होती है। इसके साथ ही बाजार की भी समझ आ जाती है। उत्पादित समान को बजार मे बेचना भी जरुरी होता है जिससे की आय का पुख्ता स्त्रोत बन सके। एक उप्रक्रम को विकसित करने के लिए शुरुआती प्रयास भलेही वोझील लगे लेकिन धिरे-धिरे यह एक बड़ी व्यवस्था मे बदल जाता है।

कार्य उत्साह मे व्यक्ति का विकास ज्यादा होता है। इसके लिए व्यक्ति को अपने पसंद की ही कार्य करने की सोचनी चाहिए। पसंद की सोच ज्यादा गहरी होती है। हमारा दिमाग भी इस कार्य को जल्दी समझ लेता है और उपनी प्रतिक्रिया भी जल्दी देता है। इसके लिए लगातार प्रयास करते रहने की जरुरत है। वोझील और उबाऊ लगने वाला कार्य कभी भी पुर्ण नही हो सकता है इस लिए कार्य को मनोयग से करते रहने की जरुरत है।

आजकल लघु उद्योग का तेजी विकास हो रहा है। क्योकी सरकार के द्वारा स्टार्टअप को बल दिया जा रहा है। हलांकी बहुत सारे असफल भी हो जाते है फिर भी कार्य की दिशा लगातार बनी हुई है। नयी – नयी संभावनाओ को तलाशा जा रहा है। लगातार हो रहे काम ने लोगो की जगरुकता को बढ़ा दिया है। यह बढ़ी हुई जागरुकता ही व्यक्ति को लगातार नया करने की प्रेरणा देता है।

राष्ट्रीय लघु उद्योग के विकास की अपार संभावनाओं के बीच स्वयं के स्थिर रखना और बनाये रखना एक चुनौती पुर्ण कार्य है फिर भी व्यक्ति को इसपर कार्य करते रहना चाहिए जिससे की उसकी उन्नती और समृद्धी को बल मिले। 30 अगस्त के दिन को खास तौर पर इस विषय पर चिंतन के लिए बनाया गया है जो व्यक्ति को उत्साहित करे और एक दुसरे से जुड़ने और समझने का मौका मिले। अपने पसंद के कार्य को जरुर चुनीये और आगे बढ़ते रहीये यही आज का सबसे बड़ा प्रेरक प्रसंग है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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