स्वदेशी साक्षरता दिवस

स्वदेशी साक्षरता दिवस
	स्वदेशी साक्षरता दिवस
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स्वदेशी साक्षरता से मतलब अपने देश की शिक्षा व्यवस्था है। शिक्षा का संबंध जीवोकोपर्जन से होता है। जिवोकोपार्जन के लिए जरुरी शिक्षा काफी महत्वपुर्ण होता है। इसके बिना किसी भी कार्य को करना मुश्किल होता है। शिक्षा व्यक्ति के धारण क्षमता पर निर्भर करता है कि वह किस तरह की शिक्षा कितने समय तक ले सकता है। व्यक्ति के दिमाग को खास तरफ का ज्यादा झुकाव होता है जो उसको उस खास तरह की शिक्षा जल्दी और सुविधा के साथ ग्रहन करा सकता है।

स्वदेशी की बात करते है तो यहां की आवोहवा के साथ जीवन से जुरी जरुरतो के साथ यहां के समाजिक परिवेश को भी समझना परता है। क्योकि हमको समाज मे ही रहना है। समाज मे हर तरह के लोग रहते है जो समय के साथ अपने अनुभव को संकलन करते है। इस संकलन का विस्तार अपने आने वाले पिढ़ी तो देते है जिससे उसके अंदर एक समाजिक शिक्षा की कला का विकाश होता है। यह कला उसे वहां के समाज के साथ रहने मे वेहतर सहयोगी सावित होता है।

जीवन का मुल भाव सुख और समृद्धी ही है। व्यक्ति यदी सुख के साथ व्यवस्थित तरीके से समानजस्यता के साथ रह रहा है तो यह उत्तम व्यवस्था है। कुछ लोग विशेष कार्य के धनी होते है तो वह अपने लिए एक बड़ा परिवेश खोजते है और एक नये व्यवस्था को जन्म देते है। यहां से उसके शिक्षा की व्यवस्था कुछ अलग हो जाती है। समय और व्यवस्था के हिसाव से शिक्षा का स्तर बदलता रहता है।

स्वदेशी शिक्षा को बढावा देने की जरुरत है। आज भारत मे पुरानी भाषा संस्कृत है जो काफी समृदध है। लेकिन यह आज उपक्षा का शिकार है। हिन्दी भाषा बड़ी तेजी से बढ़ी है। जबकि भारत मे क्षेत्रिय भाषा का ज्याद वोलवाला है। लोग अपने भाषा मे ही सहजता महसुस करते है। अंग्रेजी विदेशी भाषा है। लोग इसको ज्यादा महत्व देते है क्योकि ज्यादा शोध कार्य इन्ही भाषा के लोग करते है। इस लिए इस भाषा की पकड़ गहरी हो गई। जवकि वहां के लोगो का रहन सहन अलग है।

बिज्ञान की समझ आजकल काफी बढ़ गई है। लेकिन इसको व्यक्ति तक उपयोगी बनाने के लिए भी लोग को अपने स्तर से समझादार बनने की जरुरत है। इसके लिए स्वदेशी शिक्षा को अपनाना अति उत्तम है। लोगो को चाहिए की वह अपने भाषा साहित्य, धर्म ग्रंथ से साथ जुड़े और अपनी संस्कृति कि रक्षा के लिए सतत प्रयासरत रहे। इसमें उसका कल्याण है।

प्रत्येक वर्ष सितम्बर महीन के पहले बुधवार को मनाया जाता है इस बार यह दिन 02 सितम्बर को बना है जो की खास तौर पे स्वदेशी शिक्षा की गहराई को समझते हुए लोगो को जागरुक करने का खास दिन है। समाज को चाहिए की वह इस विषय पर विचार करे और लोगो को स्वदेशी शिक्षा के लिए प्रेरित करे।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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