Year: 2026

बाबा साहेव भीमराव अम्बेदकर

बाबा साहेव भीमराव अम्बेदकर

बाबा साहेव भीवराव अम्बेदकर   बाबा साहेव भीव राव अम्बेदकर जी का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के महु मे हुआ था। वे अपने माता पिता के 14 वें संतान थे। बचपन से ही उन्होने सामाजिक तान-वाना को करीव से देखा। समाज मे छुआछुत की व्यवस्था उस समय चरम पर थी। उन्होने अपने कार्य क्षमता को बढ़ाया और उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होने कोलंबिया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स दोनो ही विश्वविध्यालय से इकोनॉमिक्स मे डॉक्ट्रीयट की उपाधी प्राप्त की। उन्होने विधी शास्त्र पर शोध भी किया।    भारत के संविधान के प्रारुप समिति के अध्यक्ष बने। वे स्वतंत्र भारत…
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वरदान का महत्व

वरदान का महत्व

वरदान का महत्व वरदान का महत्व भक्त और भगवान का बड़ा ही अनुठा संबंध होता है। भक्त भगवान के प्रति जितना आसक्त होता है भगवान के वो उतने ही करीव होता है। उसकी भक्ती उसको इस लायक बना देती है की वो हर परिवर्तन का मिल्यांकन कर सकता है। अपने इस गुण के कारण उसकी समझ अच्छी हो जाती है। वर्तमान जीवन के कठीन पल को वो आसानी से समझते हुए वो आगे निकलता चला जाता है। उसकी ये समझ उसको संतुष्टी देती है।    भक्ति के एक पराव पर भक्त और भगवान का प्रतक्षिकण होता है जिसमे भक्त भगवान…
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एक फूल की भेंट

एक फूल की भेंट

एक फूल की भेंट   सुखद वैवाहिक जीवन के हसीन सपनो को सजाता हुआ जीवन आगे चलता जाता है। इसमे संभावनाओं के मोती जड़े होते है। इस संभावनाओ को हम अपने कार्य क्षमता और उम्मीद के सहारे सिंचते चले जाते है। जबकी प्राकृतिक रुप से वास्तविकता कुछ और ही होती है, क्योकि परिस्थिती लगातार बदलती रहती है। हमको इस बदलाव को ख्याल करके अपने कार्य को समझना और समझाना होता है। यहीं से जीवन को जीने की सच्ची अनुभूती की शुरुआता होती है। यही गुण बड़ा होकर व्यक्ति को गुणत्मक रुप मे स्थापित करता है। ऐसी ही एक कहानी का…
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महावीर जयंती

महावीर जयंती

महावीर जयंती   छठी सताब्दी ईसा पुर्व भगवान महावीर का जन्म हुआ था। इस समय छोटे-छोटे जनपद मे देश बटा हुआ था। इसी समय मगध जैसे गणराज्य का उदय हुआ। आपस मे समुदाय एक दुसरे से उलझे रहते थे। जिससे लोगो मे निराशा का वादल उमड़ने लगे थे। लोहा के व्यापक अपयोग के बाद एक बडे बदलाव की ओर लोग अग्रसर हो रहे थे। इसकी समय भगवान महावीर का आगमन हुआ। बिहार के बैशाली के निकट कुण्डलपुर ग्राम में चैत्र शुक्ल पक्ष त्र्योदशी तिथि को उनका जन्म हुआ था।   30 बर्ष की आयु मे भगबान महाबीर ने घर-बार छोड़कर…
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मजबूरी

मजबूरी

मजबूरी मजबूरी     जरुरत और व्यवस्था में समानजस्य नही होने से समस्या उतपन्न हो जाती है। यदि व्यवस्था को सही करने की हमारी कार्य क्षमता नहीं है या इसमें समय लग सकता है तो हम ततकाल अपनी जरुरत को पुरा करने के लिए जिस मार्ग का अनुसरण करते है और वो हमारी सोच मे नही है तो हम इसे मजबूरी की संज्ञा देते है। हम कार्य कर तो रहे है लेकिन मजबुरी में यानी इसम हमारी व्यवस्थित सोच जैसी उत्साह नही रहती है। इसके फलस्वरुप समय के साथ जो व्यवस्था बनती है उसमे हमारी आदत बन जाती है और हम…
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शहीद दिवस

शहीद दिवस

शहीद दिवस शौर्य और विरता की कहानी सुनकर मन उत्वेलित और उत्साहित हो जाता है। मन मे उत्पन्न होने वाला उदगार हमारे जीवन को अर्थपुर्ण बनाने के लिए हमें प्रेरित करता है। यह प्रेरणा हमे जीवन के उच्चता के भाव को सहजता से स्वीकारने के लिए हमे सहज बनाता है। यह सहजता ही हमें जीवन को परिभाषित करने मे हमारी मदद करता है। हमारा आत्मबल हमारी ताकत बनकर हमे आगे बढ़ने के लिए हमारा मार्गदर्शन करता है। सकारात्मक विचार की ओर बढ़ता हमारा कदम हमें मजबुत बनाता है। यही मजबुती राष्ट निर्माण मे अग्रणी भुमिका निभाता है।     शहीद दिवस…
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