एक फूल की भेंट
सुखद वैवाहिक जीवन के हसीन सपनो को सजाता हुआ जीवन आगे चलता जाता है। इसमे संभावनाओं के मोती जड़े होते है। इस संभावनाओ को हम अपने कार्य क्षमता और उम्मीद के सहारे सिंचते चले जाते है। जबकी प्राकृतिक रुप से वास्तविकता कुछ और ही होती है, क्योकि परिस्थिती लगातार बदलती रहती है। हमको इस बदलाव को ख्याल करके अपने कार्य को समझना और समझाना होता है। यहीं से जीवन को जीने की सच्ची अनुभूती की शुरुआता होती है। यही गुण बड़ा होकर व्यक्ति को गुणत्मक रुप मे स्थापित करता है। ऐसी ही एक कहानी का हम चिंत्रण करते है।
सुमन की दिनचार्य अपनी ही चाहत के इर्दगिर्द धुमता हुआ एक सुंदर परिस्थिती का निर्माण कर लेता है। बाहरी जीवन के जिद्दोजहद से दुर वह खुद को बहुत खुश व्यक्ति मानता है। वह ये समझता है कि उसकी समझ सबसे उत्तम है, वह एक समझदार और विश्वस्त व्यक्ति है, जो हर कर्य को अपनी सुझबुझ से हल कर सकता है। यही मनोभाव उसको एक शांतचित और कार्यशील व्यक्ति के रुप मे स्थापित करता है।
समय की चलती हुई चक्र मे उसको कोई उपयोगी सफलता तो नही मिलती है पर उसके लगनशील व्यवहार से लोग उसको असफल नही मानते है वल्कि एक उम्मीद के किरण के तरफ बढ़ते हुए व्यक्ति के रुप मे रखते है। उनकी यही विश्वास उसकी एक पहचान भी है। यही पहचान उसके एक विचारवान व्यक्ति के रुप मे स्थापित भी करता है।
युगल दामपत्य जीवन के अनमोल को संजोने के लिए मन भले ही तैयार हो लेकिन यह कार्य कठीन भी है और मनोरंजक भी। इसी आपाधापी के बीच एक संयुक्त जीवन की शुरुआत सुमन करता है यानी की रिस्तो मे गहराई को समझने की एक युक्ती संगत व्यवस्था। कठीन परिस्थिती को भी यदी विश्वास और सहयोग से जीया जाय तो एक सुखद आनन्द देता है। अपनी इस मनोभाव के साथ एक दिन एक गुलाब का फुल लेकर अपनी भार्या के पास पहुँचता है उसकी भार्या इस बात से अनजान थी की गुलाब की महत्ता कितनी होती है। ओ तो वर्तमान जीवन को उच्चता को समझते हुए सबसे उच्च सम्मान वाले लोगो के विच स्थापित होने के ख्वाब पाल रही थी। पर इस गुलाब का वो क्या करे।
गुलाब को देखते ही उसके मन मे एक त्वरीत विचार आया की इसकी जुरुरत तो है नही जबकी हम एक संयुक्त जीवन मे है यहां तो अपनी निजी जरुरत के साथ एक संयुक्त जीवन को उच्चता की ओर अग्रसार होना है। इस विचार के संयुक्त होते ही उसने साथी के दिये गुलाब को निचे फर्स पर फेक दिया। गुलाब अपने मे बस एक फुल है जबकी उसको देने वाले की पुरी भावना उसमे समाहित है इस मनोभाव को समझने की दोनो को जरुरत है जबकि दोनो अपने ही मनोभाव मे मस्त है तो कहां से विचार के फुल को सम्मन मिलता।
सुमन ने फुल को उठाया और उसे अपने आलमारी मे साजा दिया जिससे की उसके इस भाव को एक दवाव मिलता रहे कि उसको इसके लायक बनना है जिससे की इसकी महत्ता बनी रहे। समय की धारा मे कई साल बिते और अब एक नये बिचार को समझने के लिए मन तैयार है नयी जिम्मेदारी ने अपनी पकर एक दुसरे पर बना लिया है। इसी समय मे मन की प्रफुल्ता भी बढ़ने लगी है। प्रफुल्लीत मन से सुमन की ने भार्या आज एक गुलाब की कली को सुमन को भेंट दिया। सुमन ने इसे सहर्ष स्विकार किया जिससे की हर्षिता ने अपनी मुश्कान देकर स्वागत की। इसी समय सुमन अपने मनोभाव को नही रोक पाया। उसने कहा कि एक गुलाब को अपने साथी की जरुरत थी वर्षो पहले वह यहीं पर उपेक्षा का सिकार हुआ था आज उसको अपना साथी मिल गया है। हर्षिता को अपने भुल याद आ गई की इस कहानी की असली किरदार वही है। वह स्विकार की उसकी उस समय उसकी समझ अलग थी जो इस भाव को नही समझ सकी जौसा की आज ओ समझ रही है। काश उसे उस समय ही ऐसा महसुस होता तो आज का मौसम कुछ और होता।
वो यह कहती है कि मनोभाव का संवंध हमारे वर्तमान के परिवेश की अवलोकन और परिस्थिती से होता है। इसलिए लगातार विचार को समझने और संवारने की जरुरत होती है। सुमन ने इस गुलाब को अपने पुराने गुलाब से मिला दिया। इस प्रसंग की भाव भंगिमा एक प्यार की गहराई को दिल की गहराई मे स्थापित कर दिया। हर्षिता को लगा की उसको अपने भुल की किमत शायद उसकी अपनी ही अनुभूती है जिसमे वह खुद को एक कटधरे मे खरा कर रही है। इस समय भले ही वो जैसा भी प्रतिक्रिया दे लेकिन प्यार की व्यवस्था ने एक दुसरे प्रति समझने की नजरीया ही बदल दिया।
एक फुल की भेंट ने एक एहसास को जगा दिया। एक भुल को एक गहरे एहसास से साथ मिलाकर एक दुसरे के प्रति नजरीये को बदल दिया। हमे एक दुसरे को समझने और परखने के लिए यक्ति पुर्ण कार्य करना होता है क्योकि हमारा मन सतत ही क्रियाशील रहते हुए बहुत कुछ सिखता है और बहुत कुछ भुलता भी है उसके लिए हमे एक युक्ति लगानी होती है जिससे की स्थापित विचार को समझा जा सके और उसका समय से स्वयं के लिए सावांरा जा सके।
संयुक्त और गुणकारी जीवन को जीने के लिए हमे सतत ही सावधान रहना परता है न जाने जीवन के किस मोड़ पर कौन सी बाधा आ जाय। हमारी प्यार की गहरी समझ हमे हर परिस्थिती से निकलने का ताकत देती है। एक फूल की भेट हमे जीवनोउपयोगी बात को समझने में काफी मदद की। चाहत की मंजिल को अपनी एक नई उम्मीद जगाने के लिए आगे की ओर बढ़ते हुए जीवन को अनुरागी बना दिया। धन्यावाद
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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