
राष्ट्रीय पड़ोसी दिवस (National Neighbour Day)
किसी भी राष्ट्र के निकटवर्ती सीमा को साझा करने वाले राष्ट्र को पड़ोसी राष्ट्र कहते है। सीमा को साझा करने के लिए दोनो राष्ट्र के बीच एक संधी होती है जिसके आधार पे सीमा का निर्धारण किया जाता है। बीतते समय के साथ जब राष्ट्र के शक्ति मे उत्तरोत्तर विकास होता है तो सीमा का मुल्यांकन किया जाता है। इसी मुल्यांकन मे पुराने समय के सभी बिन्दु कि समीक्षा की जाती है और फिर निर्णय लिया जाता है कि इस बिषय को फिर से समझा जाय। यहीं से विवाद का जन्म होता है। यहां विवाद का विषय पड़ोसी की बढ़ती सामरीक क्षमता है जिसने उसको असहज बना दिया है। इसकी गहराई मे जाकर विषय को तार्किक नजरीये से देखने की जरुरत है जिससे की शांती को स्थापित किया जा सके।
सीमा साझा करने के कारण सीमा के कुछ दुरी तक लोग समान्य रुप से आवाजाही करते है। लेकिन इसके बाद के दुरी के लिए पुर्ण प्रतिवंध लग जाता है। मित्र देश के साथ तो खुली सीमा का प्रावधान भी होता है जैसे भारत नेपाल की सीमा पर है। सीमा पर कड़ाई से पहरा भी होता है जैसे भारत पाकिस्तान की सीमा पर है। भारत चीन की सीमा पर भी विवाद है लेकिन इसके कारण वहां समय-समय पर सैनिक गतिविधी देखने को मिलती है। अभी भारत और बंगलादेश की सीमा पर विवाद है। जब भी किसी देश की आंतरिक शक्ति मे फेरबदल होता है तो सीमा विवाद एक विषय बन जाता है। इसका कारण भावनात्मक भी है जिससे देश की लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचना होता है। जिससे की देश भक्ति की भावना का बृद्धी हो और दुसरे मुद्दे दब जाय।
पड़ोसी देश के साथ व्यपार की गतिविधी काफी अच्छी होती है क्योकी आवगमन आसान होता है। एक दुसरे के आंतरिक विचार भी मिलते जुलते रहते है। लेकिन कहां जाता है कि राजनिति मे कोई स्थाई मित्र और कोई स्थाई दुश्मन नही होता है। इसलिए यहां भी यही नियम चलता है। कोई भी समझैता स्थाई नही होता है। पर समय के साथ पड़सी देश के साथ व्यपार चलता है। किसी बिपत्ती के समय एक दुसरे के काम आने के लिए पड़ोसी ज्यादा कारगर होता है। तुरंत सहायता पहुँच जाती है। जैसे की नेपाल मे भुस्खलन और बाढ़ की भयंकर विभिषिका के कारण भारत ने तुरंत अपनी सहायता भेजी जिसके कारण उसको संभलने का पुरा मैका मिला।
बंगलादेश की आंतरिक गतिविधी के कारण कई तरह के उलट पुलट फैसले ले लेता है और यह चाहता है कि वह विकास की गितीविधी मे सबसे आगे निकल जायेगा। यही भूल उसको भारी परती है। जबकि पड़ोसी भारत उसके लिए लगातार सहयोग के लिए तैयार रहता है। भारत की अपनी तरफ से उसका साथ निभाता है फिर भी वह अपने को आगे निकलने की चाह मे पड़ोसी को खड़ी-खोटी सुनाने लगता है। जिससे आपसी रिस्ते बिगरने लगता है। इसी कारण से कई बार विचार विमर्ष विगरने की स्थिती पैदा हो जाती है। भाषा संस्कृति और आपसी रिस्ते एक देश को दुसरे के साथ सहयोग करने के लिए सदैव मैका देते रहते है पर स्वर्थबाद की राजनिती उसको सामान्य व्यवहार का कड़ा करने के लिए प्रेरित करता है।
राष्ट्रीय पड़ोसी दिवस इसी भाव को जागृत करता है कि एक पड़ोसी देश दुसरे पड़ोसी देश के साथ मेलजोल बढ़ाये और व्यापार तथा संस्कृतिक आपाद प्रदान के साथ ही शांती समझैते के उच्च मानंडंड को स्थापित करे जिससे विकास की उच्च स्तर को पाया जा सके। 28 सितंम्बर का खास दिन इसी विषय को समझने तथा आपसी मेलजोल बढाने के लिए पड़ोसी राष्ट्र को प्रेरित करता है। आपसी विश्वास की गांठ को बनाये रखने तथा एक दुसरे के प्रति निष्ठा की भावना को उच्च बनाने के लिए प्रेरित करता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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