
सर्व आत्मा दिवस/ All Souls Day
व्यवहारिक जीवन को जीते हुए सुख दुख के भावानाओं मे बंधा हुआ मन उलझा रहता है। यह उलझन तनाव पैदा करती है। तनाव को साधने की कला के धनी लोग इस पल को एक विशेष व्यवस्था के तहत जीते हुए आगे निकल जाते है जवकि कुछ लोग इसमे बंधकर अपना अहित कर लेते है। जीवन के पार देखने वाली हमारी दृष्टी यदी नहीं खुली है तो हमारा ये मानव शरीर का बंधन की हमे सबसे बड़ी युक्ती नजर आती है। यदी हमारा नजरीया आत्मीय स्तर तक की साधना को पा लेता है तो हम पाकृति के करीव रहकर खुद को करीव से देखते हुए आगे निकलते रहते है। हमारी आनुभूति हमे उत्साहित करती रहती है। हमारे अनुभव, आत्मीय शक्ति को उध्वेलित करता हुआ हमे कार्योचित व्यवहार को करने की प्रेरणा देता रहता है।
हमारी सोच की एक नयी दिशा आत्मीय भाव से ही आती है। यह वो भाव है जो वर्तमान जीवन को करीव से देखते हुए हमे उच्च विचार के साथ कार्य योजना बनाकर निकलने और सहयोग लेने की मनोदशा को उतकृष्ट बनाता है। आत्मीय जीवन को महसुस करना और यथेष्ट कार्य करने की कला का समायोजन होना एक बहुत बड़ी कला है।
आत्मीय जीवन की गहरी अनुभूति व्यवहारीक जीवन की बहुत सारी बंधन से मुक्त कर देता है। वह भौतिक जीवन से खुद को शक्ति अर्जित करने की कला का विकास करते हुए मानवी जीवन के सफलता के सोपान तक ले जाता है और एक प्रेरक बनकर एक उत्कृष्ट समाज का निर्माण करता है।
जीवन की चुनौतियों का सामना करता हुआ व्यक्ति जो सिख लेता है उससे खुद को गुणवान और चरित्रवान बना लेता है वह व्यक्ति अपने अनुसार से जीवन को संचालित करता हुए आने वाले नवीन जीवन को भी समझ लेता है। उसकी यही समझ उसे खुसी देती है। सभी आत्मीय संस्कार के महसुस करने की इस खास दिन से जरीये व्यक्ति खुद को और दुसरे गुजरे हुए आत्मीय जीवन को याद करता हुए एक नवीन चेतना का विकास करता है।
02 अक्टूबर का खास दिन इसी विधा का समझाता हुआ व्यक्ति को जीवन के पार जाकर सोचने और खुद को उर्जावान बनाने की कला के प्रति आरुढ करता है और एक सफल जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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