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भोगवादी समाज का दर्द

भोगवादी समाज का दर्द

भोगवादी समाज का दर्द विज्ञान ने हमारे सोंच के मूल अवधारणा को बदल दिया है, जिसके कारण हमारी सोच भौतिकतावादी होकर रह गई है। इसी भौतिकतावादी सोंच के कारण हमारे अंदर भगवान के द्वारा गलत करने पर दंड देने की सोंच मे परिवर्तन आ गया है जिसके कारण आज समाज का परिदृष्य बदल गया है। अपराध करने वाले को व्यवस्था का डर होता है जबकि पहले भगवान का भी डर होता था। आज भी कुछ ऐसे लोग है जो भगवान की प्रभुसत्ता को स्वीकारते है और उसके अनुरुप आचरण भी करते है जससे समाज के अंदर गुणता बनी हुई है।…
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