यादें

वक्त का आईना

वक्त का आईना

वक्त का आईना वक्त के आईना मे खुद को निरखना एक कला है अपने अंदर की ओर झांकने का कार्य ऋषि मुनी करते है, जिससे की उनका आत्म दर्शन हो जाता है। लेकिन व्यवहारिक मनुष्य के लिए ऐसा कर पाना समान्य व्यवहार मे नही आता है। इसलिए वह समय के साथ अपनो को ढ़ालने के लिए वक्त के आईना मे खुद को देखता है तथा जीने की कला विकसित करता है जिससे की वक्त के साथ सही तरीके से समायोजन हो सके। जिससे बाद वह खुद को आगे निकालने के लिए यथेष्ट बन जाता है।      यहां लेखिका खुद को…
Read More
श्रधेय बिदाई

श्रधेय बिदाई

श्रधेय बिदाई हमारा नित्य प्रति लोगो से मिलने जुलने का कार्य चलता रहता है, ऐसे मे कुछ ऐसे लोग होते है जो अपना एक प्रभाव छोड़ जाते है, जिन्हे हम कार्य उन्मुख होते समय उनकी याद करते है। ऐसे लोगो के प्रति हमारा भाव एक बिचार बनकर हमारे अंदर रह जाती है। इन्ही बिचारो की एक कड़ी हम यहां भेंट कर रहे है। कार्य मे प्रखरता तथा ततपरता व्यक्ति को एक दुसरे से जोडने का जो कार्य करता है उसका प्रभाव बनता है। कार्य के प्रति लगाव की गाथा को सुनाकर एक दुसरो को प्रोत्साहन करने की बात सतत चलती…
Read More
error: Content is protected !!